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तेरहवां पीरियड
टिप पर आधारित निवेश में जोखिम सर्वाधिक है। कीमतों से छेड-छाड करने वाले तिकडमी लोग टिप्स उछालते हैं। शेयर कीमतों में उछाल देखने पर निवेशक टिप को भरोसेमंद मान बैठते हैं और टिप के पीछे दौड़ पड़ते हैं। ब्रोकर भी टिप जारी करता है लेकिन दी गई टिप को उसके अपने हितों के परिप्रेक्ष्य में ही देखा जाना चाहिए। ब्रोकर हर राय के साथ यह घोषणा जरूर जारी करता है कि इससे उसका कोई निजी निवेश या दूसरा हित नहीं जुडा हुआ है। यह मात्र औपचारिकता है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने समय-समय पर निवेशकों के हित सुरक्षित करने के लिए तमाम नियम-कायदे लागू किए हैं। जिस ब्रोकर को आप चुनना चाहते हैं, उसके बारे में सेबी और शेयर बाजारों की अपनी वेबसाईटों से जानकारी जरूर कर लें। संबंधित ब्रोकर के खिलाफ हुई किसी कार्रवाई, किसी चेतावनी, किसी गैरमामूली टिप्पणी आदि का संज्ञान जरूर लें। सेबी और शेयर बाजार की जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर ब्रोकरों का परीक्षण करें, कि वे निवेशकों को निर्धारित मानक के न्यूनतम स्तर के मुताबिक सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं, अथवा नहीँ।
अच्छी सलाह के अलावा, सहज कारोबार के लिए अपने ग्राहकों को एक भरोसेमंद प्लेटफार्म मुहैया कराना भी ब्रोकर की जिम्मेदारी है। शेयर-बाजारों, डिपॉजिटरी कंपनियों, ब्रोकर के मुख्यालय और आपकी लोकेशन के दरम्यान तेज गति वाली इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्था, कंप्यूटर सिस्टम्स और नेटवर्किंग प्रणालियां, सूचना-तकनीकी की उच्च गुणवत्तायुक्त व्यवस्था, सहज और तीव्र लेन-देन के लिए जरूरी है। इसमें जरा भी गडबडी, लोगों के लिए भारी नुकसान का कारण बनती है। बैंक से लेन-देन संबंधी सुचारू कनेक्टिविटी, ब्रोकर के बैक-ऑफिस से 24 घंटे सातों दिन इंटरनेट सुविधा, व्यापार सूचनाओं, सौदा-निबटान, कन्फर्मेशन, निवेश पर घाटा और मुनाफा, वित्तीय स्टेटमेन्ट और डिपॉजिटरी होल्डिंग संबंधी सूचनाओं के समय पर सटीकता के साथ मिलने की व्यवस्था, आदि ऐसी चीजें हैं, जिनमें अधूरापन आपके और लक्ष्यों के बीच बाधा की तरह काम करेगा। लिहाजा ब्रोकर ऐसा हो, जिसके द्वारा स्थापित किए गए सूचना तंत्र में किसी ग्राहक को कोई शिकायत न होती हो।
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कुछ लोग ब्रोकरों के द्वारा ली जाने वाली ब्रोकरेज उर्फ कमीशन के रेट पर ज्यादा ध्यान देते हैं। याद रखिए, यहां कोई चैरिटी करने के लिए नहीं बैठा हुआ। अच्छे ब्रोकरों के रेट आपस में प्रतिस्पर्धी होने के बावजूद उनका अपना एक लेवल होता है। औसत निवेशक के लिए ब्रोकर की फीस, उसके कुल निवेश का बहुत मामूली हिस्सा होती है, लेकिन इस पर पूरे निवेश की सुरक्षा और कई मायनों में सफलता निर्भर रहती है। आप जितनी जल्दी-जल्दी खरीद-फरोख्त करेंगे, आपसे हर अन्तरण पर ब्रोकर उतना ही ज्यादा कमीशन कमाएगा। कम रेट वाला ब्रोकर ढूंढ रहे हैं, तो उसके द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के स्तर पर गौर जरूर फरमा लें। उसके बुनियादी ढांचे को बारीकी से देख लें और पुराने ग्राहकों में कोई विशेष परिचित हो, तो उसके अनुभव जरूर ले लें।
एक सोच यह है कि जिन आर्थिक संस्थाओं में आप कारोबार करते हैं (शेयर बाजार या कमोडिटी एक्सचेंज) और जिन संस्थाओं पर निगरानी का जिम्मा है (सेबी) उनके नजदीक हम नहीं, बल्कि हमारा ब्रोकर होता है। हम तो बहुत दूर हैं, और शेयर-बाजारों एवं अन्य प्रमुख संस्थाओं की नस-नस से वाकिफ ब्रोकर से हम कैसे पार पा सकते हैं। यहां ध्यान यह रखना चाहिए कि ठोंक-पीट कर ब्रोकर चुनने और बाद में भी उस पर अंधविश्वास करने के बजाय, अपने विवेक से काम करने का मतलब यह नहीं, कि ब्रोकर से आपका कोई मुकाबला है। ब्रोकर ही नहीं, कोई भी व्यक्ति किसी को भी धोखा दे सकता है, अगर वह उसकी लालच की अतिवादी मानसिकता को पहचान ले और उसे उसके लालच के चलते ही धोखा देने की ठान ले। कॉमन-सेंस बडी चीज है। एक्स्ट्रा समझदारी भी यहाँ काम नहीं आती। बस, आंख-कान खुले रखिए और दिमाग सचेत, इतना ही काफी है।
अगले पीरियड में हम बात करेंगे ऐसे लोगों के बारे में, जो शेयर बाजारों को जुए के अड्डों के सिवा कुछ नहीं समझते। अगर आपने भी कभी ऐसा सोचा हो, तो अगला पीरियड जरूर अटैंड करिएगा, क्योंकि मुनाफे की राहें खोलने से पहले अपनी धारणाओं को सही करना बहुत आवश्यक है। नमस्कार।
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