|
आईपीओ की वैद्य अवधि अब एक साल |
|
|
|
|
|
|
आईपीओ | द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता | शुक्रवार , 05 दिसम्बर 2008 |
मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की वैधता अवधि तीन महीने से बढ़ाकर एक साल कर दी है। जबकि, वर्तमान में कंपनियों को सेबी से अनुमति मिलने के तीन महीने के भीतर अपना आईपीओ लाना होता है। इस अवधि के बीत जाने पर कंपनियों को नए सिरे से सेबी से अनुमति लेनी होती है।
सेबी के इस नए नियम से उन कंपनियों को फायदा होगा जिन्हें अपने आईपीओ मंजूरी मिलने के बावजूद टालने पड़े थे। प्राइम डेटाबेस का कहना है कि एक दर्जन कंपनियों ने सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी ली है ताकि 13 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जुटाई जा सकें।
क्लोज एंडेड योजना से मनमानी निकासी नहीं
सेबी ने म्यूचुअल फंड को राहत देने वाले एक कदम के तहत क्लोज एंडेड योजनाओं से तय वक्त से पहले राशि निकालने पर रोक लगाने के लिए ऐसी योजनाओं को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराना अनिवार्य कर दिया है। इस कदम से एसेट मैनेजमेंट कंपनियां और आम निवेशकों दोनों ही उस स्थिति की मार खाने से बच जाएंगे जब संस्थागत निवेशक बडे़ पैमाने पर बाजार से निकल जाते हैं।
अब क्लोज एंडेड स्कीम से निकलने वाले निवेशकों को शेयर बाजार के जरिए निवेश की राशि भुनानी होगी, न कि फंड हाउस के माध्यम से। योजना के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से यूनिट में कारोबार शेयर बाजार में होगा जिससे नेट असेट वैल्यू पर अचानक निकासी का असर नहीं पड़ेगा।
|