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आधुनिक धृतराष्ट्र हैं सत्यम के अध्यक्ष रामलिंगा राजू |
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कंपनी समाचार | द्वारा/by : सौरभ शर्मा | बुधवार , 31 दिसम्बर 2008 |
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भारत के इतिहास में एक बार पुन: महाभारत की कथा दोहराई जा रही है और इस बार बिसात बना है कॉर्पोरेट जगत। इस खेल में धृतराष्ट्र की भूमिका सत्यम के संस्थापक राजू ने निभाई है जिन्होंने अपने पुत्र मोह में अपनी कंपनी को ही दांव पर लगा दिया। द्रौपदी की भूमिका में सत्यम कंप्यूटर स्वयं शामिल है। स्वतंत्र निदेशक जिसमें विनोद धाम जैसे दिग्गज और आईबीएस के डीन राव जैसे प्रख्यात मैनेजमेंट गुरु शामिल थे, इनकी भूमिका द्रोणाचार्य और भीष्म जैसी रही जिन्होंने द्रौपदी का चीरहरण अपनी आंखों के आगे निर्लजता से होते देखा।
अफसोस की यह घटना कलियुग में हुई और सत्यम को बचाने के लिए कृष्ण जैसे दृष्टा कहीं मौजूद नहीं थे। मेटास समूह में दिखाई गई सत्यम कंप्यूटर के प्रमोटर्स की दिलचस्पी का घटनाक्रम केवल इस डील के खात्मे पर नहीं खत्म हुआ है इससे जुड़े हुए कई समानांतर कड़ियां हर दिन प्रकाश में आ रही हैं जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किस प्रकार निवेशकों की गाढ़ी कमाई का फैसला एक झटके में संस्थागत निवेशक और प्रमोटर्स कर देते हैं। इसकी सबसे ताजा कड़ी मीडिया से छनकर आने वाली ऐसी खबर है जो किसी भी शेयरधारक के लिए झटके से कम नहीं है।
बताया जाता है कि सत्यम के प्रमोटर राजू ने अपने बेटों का हिस्सा अमरीकन कंपनी मेटास में बचाए रखने के लिए अपने हिस्से के कुछ शेयरों के बदले संस्थागत निवेशकों से कर्ज लिया था और शायद इसे कायम नहीं रख सके। इसके चलते 10 जनवरी को प्रबंधन की बैठक रखी गई है जहां पर मैनेजमेंट के नए सिरे से पुनर्गठन पर विचार किया जाएगा। बताया जाता है कि कुछ संस्थागत निवेशकों की इच्छा है कि नए प्रबंधन समूह में कुछ प्राइवेट इक्विटी फर्म ज्यादा हिस्सेदारी प्राप्त करें। यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आईबीएम अथवा कैपजेमिनी जैसे बड़े समूह कंपनी का अधिग्रहण करने पर विचार कर रहे हैं।
विदेशी हाथों में बेचने का षड़यंत्र:
सत्यम डील भारत के कॉर्पोरेट इतिहास की पहली ऐसी घटना है जब प्रमोटर्स ने अपने पारिवारिक हितों की रक्षा के खातिर भारत की सबसे कुशल सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता कंपनियों में से एक सत्यम के भविष्य को गिरवी रख दिया। केवल यही नहीं, इस डील ने इधर के वर्षों में चल रही भारतीय उद्यमियों की उन श्रेष्ठ उपलब्धियों की श्रृंखला भी तोड़ दी है जिसमें कोरस और नोवैलिस जैसी कंपनियों का अधिग्रहण शामिल था।
फिलहाल यह अटकलें हैं कि आईबीएम अथवा कैपजैमिनी सत्यम में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं। गौरतलब है कि 200 करोड़ डॉलर नगद रखने वाली यह कंपनी पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ सेवाप्रदाता कंपनियों में से है और जीई, डयूपांट जैसी कंपनियों को यह सेवा प्रदान करती है। इस कंपनी के दुनिया भर में 690 क्लाएंट हैं।
प्राइवेट इक्विटी प्लेयर भी खेल में:
सत्यम में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्राइवेट इक्विटी प्लेयर भी शामिल हैं। गौरतलब है कि इन्हीं अटकलों के बीच सत्यम का शेयर 9.64 फीसदी चढ़ गया। बताया जाता है कि टीपीजी, केकेआर जैसी प्राइवेट इक्विटी कंपनियां सत्यम के शेयर में रुचि ले रही हैं। गौरतलब है कि सत्यम के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक एबरडीन एसेट मैनेजमेंट ने सत्यम के प्रबंधन में बड़े स्तर पर बदलाव को आवश्यक बताया है।
बताया जाता है कि नए सिरे से प्रबंधन के निर्माण के लिए संस्थागत निवेशक प्राइवेट इक्विटी फर्मों से बातचीत कर रहे हैं। विश्लेषक मानते हैं कि सत्यम के प्रबंधन में हिस्सेदारी प्राप्त करना हर हालत में फायदे का सौदा है, सवाल केवल यह है कि मंदी के वातावरण में ऐसा कर पाना किस कंपनी के लिए संभव होगा।
कर्मचारियों से भरोसे की अपील:
राजू ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि वह कंपनी की साख वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कंपनी के 50 हजार कर्मचारियों को लिखे गए पत्र में उन्होंने कहा, 'हम आपकी सहायता के बिना ऐसा नहीं कर सकते हैं। मैं आप सबसे कंपनी पर अपना भरोसा बनाए रखने की गुजारिश कर रहा हूं।'
यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया है जब कंपनी के कई कर्मचारी दूसरी कंपनियों में नौकरी तलाश कर रहे हैं। राजू ने पहली बार खुलकर निदेशक मंडल के सदस्यों की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मेटास सौदे का फैसला निदेशक मंडल के सभी सदस्यों की मंजूरी से ही किया गया था। इस बीच सत्यम बोर्ड के दो स्वतंत्र निदेशकों टी आर प्रसाद और वी एस राजू ने कहा है कि वो इस्तीफा नहीं देंगे।
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