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राजू चांगला माणस आहे....नहीं...। |
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खास फीचर | द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता | सोमवार , 12 जनवरी 2009 |
फिर हेराफेरी फिल्म... जिन्होंने देखी होगी उन्हें याद होगा कि इस फिल्म के एक दृश्य में जब राजू (अक्षय कुमार) श्याम (सुनील शेट्टी) से रुपए दुगुना करने वाले एक कागज पर सइन करने को कहता है तो वह रुक जाता है। उसे लगता है कि इस मामले में कोई गड़बड़ है। लेकिन बाबू भैया (परेश रावल) का कहता है कि अरे अनाड़ी साइन कर...मुझे राजू पर पूरा भरोसा है रे...राजू चांगला माणस आहे। (राजू अच्छा आदमी है)। लेकिन देश की 21 साल पुरानी और चौथी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज पर लाखों निवेशकों ने भरोसा किया उनका राजू भी इस फिल्म के राजू की तरह धोखेबाज निकला।
समूची दुनिया में इंफोर्मेमेशन टेक्नालॉजी में अपना डंका बजवा रहे देश भारत का सत्यम के तकरीबन 70 अरब रुपए के घोटाले ने सिर शर्मसार कर दिया। दुनिया भर के लोगों ने इसकी तुलना एनरॉन जैसे घोटालों से की और अब हमारे उन प्रतिस्पर्धियों की मौज हो सकती है जो आईटी के क्षेत्र में भारत के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। सत्यम के इस घोटाले के बाद सरकार, सेबी और निवेशक जागे लेकिन अपने देश के इतिहास को देखा जाए तो डीएसक्यू सॉफ्टवेयर, सिल्वरलाइन इंडस्ट्रीज, पेंटामीडिया ग्राफ्क्सि, सॉफ्टवेयर साल्यूशंस और हिमाचल फ्युच्युरिस्टिक में जब निवेशकों को तगड़ी चपत लगी तभी सारी व्यवस्थाएं चाक चोबंद कर दी जाती तो आज सत्यम के हादसे को काफी कुछ टाला जा सकता था या यह होता ही नहीं। यह तो बात हम बड़ी कंपनियों की कर रहे हैं लेकिन छोटी छोटी कितनी आईटी कंपनियां निवेशकों को चूना लगाकर चलती बनी होंगी यह खोजबीन का विषय हो सकता है।
हरिदास मूंदडा, हर्षद मेहता और केतन पारेख जैसे नटवरलालों ने व्यवस्था में मौजूद खामियों का ही फायदा उठाया। इसी राह पर सत्यम के राजू चले फिर चाहे उन्होंने इस घोटाले से निजी लाभ न उठाने की बात कही हो लेकिन विश्वासघात, धोखेबाजी और इससे बड़ी देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दागी बनाना एक बड़ा अपराध है। एलएंडटी इंफोटेक के सीईओ सुदीप बनर्जी का कहना है कि कुछ समय तक के लिए सत्यम विवाद भारतीय कंपनियों की छवि पर असर डालेगा। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह संकट भरा दौर होगा।
सत्यम कंप्यूटर के अध्यक्ष रामलिंगा राजू जो पिछले कई साल से कंपनी के बहीखातों में आंकड़ों से खेल रहे थे, तब फंस गए जब उन्होंने पुत्र मोह में फंसकर मेटास इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटास प्रापर्टीज का अधिग्रहण करने का खेल खेला जिसका सभी निवेशकों ने इतना जोरदार विरोध किया कि पहले कंपनी के निदेशकों एम राममोहन राव, कृष्णा पालेपु, विनोद धाम को जाना पड़ा और फिर कंपनी के संस्थापक एवं अध्यक्ष रामलिंगा राजू की बारी आई। राजू पर निवेशकों को इतना जबरदस्त दबाव आ चुका था कि वे चाहते हुए भी कंपनी में बने नहीं रह सकते थे। हालांकि, उनका इरादा शायद मेटास इंफ्रा और मेटास प्रापर्टीज का अधिग्रहण कर अब तक किए गए काले कारनामे को सफेद करने का था जिसमें यह बताया जाता कि इन कंपनियों के अधिग्रहण में अमुक रकम खत्म हुई है जबकि यह अधिग्रहण बगैर पैसे होता और अब तक का सारा घोटाला सफेद हो जाता और राजू जेंटलमैन बने रहते। लेकिन कंपनी में उनकी घटती गई शेयर होल्डिंग और निवेशकों के दबाव ने उन्हें यह समझा दिया था कि अब उनके पाप का घड़ा भर चुका है।
इस्तीके के साथ राजू का सत्यम पर 21 साल से चल रहा शासन खत्म हो गया लेकिन कंपनी के 53 हजार से ज्यादा कर्मचारियों और लाखों निवेशकों की ऐसी समस्यों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी उन्होंने नए वर्ष की शुरुआत में कल्पना नहीं की थी। राजू ने कहा कि कंपनी के बही खाते में दिखाया गया 5040 करोड़ रुपए का मुनाफा केवल दिखावा है। इसके अलावा कंपनी द्वारा दिखाई गई 376 करोड़ रुपए की आय भी फर्जी है। उन्होंने स्वीकार किया कि बही खाते में 5361 करोड़ रूपए का फर्जी लेखा जोखा दिखाया गया है। कर्जदारों पर बकाए को भी बढाचढा कर दिखाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के प्रबंधन में धोखाधड़ी काफी साल पहले शुरू हुई लेकिन निदेशक मंडल ने इस फर्जीवाड़े की जानकारी होने से इनकार किया है।
गौरतलब है कि 10 जनवरी को सत्यम के निदेशक मंडल की बैठक होनी थी जो अब रद्द हो गई है। कंपनी का सारा नियंत्रण अब सरकार के हाथ में है। उसने तत्काल कदम उठाते हुए दस नामित निदेशक नियुक्त करने की बात कही है जिसकी बैठक अगले एक सप्ताह में होगी। सत्यम के लिए सरकार ने यह कदम उठाकर उसे बैलआउट करने का बेहतर कदम उठाया है लेकिन कंपनी का कामकाज कितना सच है और कितना झूठ यह आना अभी बाकी है। कंपनी कागज पर कितनी है और सच्चाई में कितनी, यह जब जगजाहिर होगा तो हो सकता है निवेशकों को और झटके सहने पड़े। देश के कार्पोरेट जगत में यह पहला ऐसा मामला है जिसमें आम जनता के पैसे का दुरूपयोग किया गया है। सत्यम देश की चौथी बडी आईटी कंपनी है।
दूसरी ओर, सेबी ने सत्यम की घटना को हिलाकर रख देने वाली घटना बताया है। सेबी का कहना है कि वह कानून के तहत तय हर कदम उठाएगी। सेबी के अध्यक्ष्ा सी वी भावे का कहना है कि हम मंत्रालय और कार्पोरेट मामलों के विभाग के संपर्क में हें। हम इस मसले पर भी बातचीत कर रहे हैं कि कानून के तहत सेबी को किस तरह के अधिकार दिए गए हैं। लेकिन अचरज होता है कि बाजार का नियामक किस तरह काम करता है कि उसे कंपनी का लेखा जोखा देखने के बाद बरसों से चल रहे घोटाले की भनक तक नहीं लगी और उसने उस ऑडिटर प्राइसवाटर हाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) की रिपोर्ट पर आंख बंदकर भरोसा किया, जो दुनिया भर में पहले ही ऑडिट के खेल में गड़बडि़यों के लिए कुख्यात रहा है। ग्लोबल ट्रस्ट बैंक और डीएसक्यू सॉफ्टवेयर में प्राइसवाटर हाउस कूपर्स की रही भूमिका को लेकर सेबी को पहले से ही सचेत रहना चाहिए था कि यह ऑडिटर अब विश्वसनीय है या नहीं। लेकिन आम निवेशक के हितों की कागजी रक्षा का दावा करने वाली सेबी अब जागी और सत्यम घोटोले को एक दुर्घटना करार दिया। लेकिन सेबी और सरकार ऐसी कितनी दुर्घटनाएं चाहती हैं। असल में अब देश की सभी आईटी कंपनियों की कड़ाई से जांच होनी चाहिए।
पीडब्लूसी ने अपने देश में पिछले कारोबारी साल में तकरीबन 139 कंपनियों के लिए ऑडिट का काम किया। इनमें से 17 शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हैं और 45 बीएसई 500 इंडेक्स का हिस्सा हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ कंपनियां अब पीडब्लूसी से अपने संबंध रखने की समीक्षा कर रही हैं। इन कंपनियों में ग्लेनमार्क फार्मा भी शामिल हैं। इस कंपनी की 27 जनवरी को निदेशक मंडल की बैठक होगी जिसमें ऑडिटर बदलने पर गंभीरता से सोचा जाएगा। पीडब्लूसी के खास क्लायंट में जीएमआर इंफ्रा, युनाइटेट ब्रुवरीज, युनाइटेड स्पिरिट्स, पिरामल हेल्थकेयर, मैरिको और मारुति सुजुकी शामिल हैं।
आईटी सेक्टर के बारे में आम मानस पर यही समझ है कि यहां जालसाजी नहीं होती लेकिन यह धारणा अब गलत साबित हो गई है। आईटी भी अब भारतीय बिजनेस का ही हिस्सा है। इसके अंदर भी वही खामियां हैं जो भारत के दूसरे उद्योगों में हैं। 50 अरब डॉलर वाले आईटी सेक्टर को ग्राहकों की तरफ से उनके बही खातों की गुणवत्ता को लेकर उठाए जाने वाले सवाल के लिए तैयार रहना होगा। क्वात्रो बीपीओ सॉल्यूशंस के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रमन रॉय का कहना है कि अपने अकाउंटिंग में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने के बारे में अब भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर को साबित करना होगा।
सरकार और सेबी कहना है कि सत्यम घोटाले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। कानून के जानकार भी कह रहे हैं कि देश में राजू को अधिकतम 10 साल की सजा और 24 करोड़ रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। अमरीका में रह रहे कंपनी के कुछ स्वतंत्र निदेशकों को भी कैद और जुर्माना भरने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। इन निदेशकों की सजा का आधार केवल यह नहीं होगा कि वे इस जालसाजी के बारे में जानते थे या नहीं बल्कि ये निदेशक अपने कर्तव्य को सही तरीके से पूरा करने में विफल रहे। अमरीकी कानूनों के तहत राजू को 24 साल की कैद और अरबों डॉलर के जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है। लेकिन व्यवस्था पहले से बेहतर होती तो काफी कुछ टाला जा सकता था। हम तब जागते हैं जब हमारे यहां इस तरह के घोटाले हो जाते हैं। अतीत में हुए घोटालों के बाद सरकार और सेबी ने सब कुछ चुस्त दुरुस्त करने की बातें तो खूब कहीं लेकिन लगता है समय के साथ बेहतर व्यवस्था करना भूल गई।
सत्यम के संस्थापक अध्यक्ष बी रामलिंगा राजू के इस्तीफे और कंपनी में हुई जालसाजी के उजागर होने के बाद सत्यम के शेयरों में तगड़ी गिरावट आई। सत्यम का शेयर जो 188 रूपए से दो दिन में सात रुपए के नीचे चला गया। जिससे निवेशकों के कितने करोड़ रुपए डूब गए यह कोई सोच नहीं सकता। पिछले 52 सप्ताह में सत्यम का उच्च भाव बीएसई पर 544 रुपए था।
कार्पोरेट जगत में चल रही चर्चा पर भरोसा करें तो सत्यम कंप्यूटर को खरीदने में अनिल अंबानी समूह, टेक महिंद्रा, एलएंडटी, आईबीएम, एचसीएल टेक्नालॉजिज, कॉग्निजैंट और जनरल अटलांटिक पार्टनर्स की रुचि है, लेकिन अभी तक कोई भी औद्योगिक घराना खुलकर सामने नहीं आया है। लेकिन सरकार ने तत्परता से जिस तरह इस कंपनी को बचाने की कोशिश की है वह सराहनीय है। सरकार ने दस नामित निदेशक नियुक्त करने का फैसला कर कंपनी और उसके 53 हजार कर्मचारियों के साथ देश के आईटी उद्योग के प्रति निवेशकों का भरोसा जीतने का स्वागत योग्य कार्य किया है। लेकिन यह तो भविष्य में पता चलेगा कि सत्यम में सब कुछ सच की नीवं पर कितना कुछ है।
सत्यम आंध्रप्रदेश की ब्रांड इमेज बन गई थी। हैदराबाद को कंपनी के नाम के साथ ही पहचाना जाता था। युवाओं के बीच सत्यम और उसके अध्यक्ष राजू नायक बन गए थे। करीब दो दशकों की मेहनत के बाद सत्यम को देश की चौथी सबसे बडी कंपनी बनाने वाले राजू को 70 अरब रूपए की धोखाधडी स्वीकार करने के बाद अब निवेशक उन्हें जोरदार सजा भुगतते हुए देखना चाहते हैं।
राजू का जन्म तटीय आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के गर्गापारू गांव में एक किसान बी. सत्यनारायण राजू के यहां 16 सितंबर 1954 को हुआ था। सत्यनारायण राजू 1960 में हैदराबाद चले आए। रामालिंगा राजू ने बीकाम करने के बाद एमबीए 1975 में अमरीका के ओहियो विश्वविद्यालय से किया। वे हावर्ड बिजनेस स्कूल के भी विद्यार्थी रहे। आईटी उद्योग में हाथ अजमाने से पहले राजू ने कंसट्रक्शन और टेक्सटाइल उद्योग में काम किया। केवल 20 कर्मचारियों के साथ 24 जून 1987 में सत्यम की शुरूआत करने वाले राजू ने फिर पीछे मुडकर नहीं देखा। 1989 में सत्यम लिमिटेड कंपनी और 1992 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी। वर्ष 1991 में सत्यम ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में कदम रखा। इसके आईपीओ के लिए 17 गुना आवेदन मिला था। सितंबर 2008 तक इसमें 52865 कर्मचारी थे। कंपनी ने वर्ष 2001 में न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार आरंभ किया।
राजू को वर्ष 2007 का सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी का सम्मान मिला था। कंपनी को वर्ल्ड काउंसिल फॉर कारपोरेट गर्वनेंस ने सर्वश्रेष्ठ कारपोरट गर्वनेंस के लिए स्वर्ण मयूर पुरस्कार से सम्मानित किया था। वर्ष 2007 में सत्यम फीफा फुटबाल विश्व कप 2010 (दक्षिण अफ्रीका) और विश्व कप 2014 (ब्राजील) के लिए आधिकारिक आईटी सेवा प्रदाता कंपनी बनी। राजू को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी का पुरस्कार मिला। वर्ष 2008 में कंपनी का राजस्व बढकर दो अरब डॉलर हो गया।
राजू के परिवार में उनकी पत्नी नंदिनी, दो पुत्र एवं एक पुत्री है। राजू के पुत्र तेजा राजू और रामा राजू मेटास इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटास प्रापर्टीज नामक कंपनियां चलाते हैं। मितभाषी राजू को उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता के कारण कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। लेकिन अब तक जिसे तेलुगू गौरव माना जाता था, आज लोगों के गुस्से के निशाने पर है।
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very good article