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मंदी में मंदी और तेजी में तेजी का गेम खेलें निवेशक: आदित्‍य जैन छापें
  
मुलाकात |  द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता |  गुरुवार , 12 मार्च 2009
aditya-jain.jpgभारतीय शेयर बाजार इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है और आम निवेशक निराश होकर घर बैठ गया है लेकिन मंदी में भी पैसा कमाया जा सकता है। बस, रणनीति बदलने की जरुरत है। यहां हर रीलीफ रैली में अपने शेयर बेचें और हर गिरावट फिर से इन्‍हें कवर कर लें। परमाणु बिजली, इंफ्रा, एफएमसीजी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, सीमेट सैक्‍टर अच्‍छे हैं। लेकिन अभी भी खरीददारी के लिए रुकना फायदेमंद साबित हो सकता है। पेन्‍नी स्‍टॉक को हाथ बिल्‍कुल न लगाएं। निवेशकों के लिए कारगर नीति यही है कि अपने पास रखें शेयरों का अवलोकन करें एवं उन्‍हीं में बिकवाली-खरीद करें। नया पैसा लगाने या एवरेज करने के लिए 6500-7000 के नीचे सेंसेक्‍स या 2250 के नीचे निफ्टी का इंतजार करें। आवेश में आकर सट्टेबाजी करने से बचें। यह कहना है‍ कल्‍पतरु मल्‍टी प्‍लायर लि., भोपाल के वाइस चेयरमैन आदित्‍य मनिया जैन का। आदित्‍य जैन से मोलतोल संवाददाता ने इक्‍विटी बाजार के हालात पर बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्‍य अंश।

शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति में एक आम निवेशक को क्‍या करना चाहिए और रणनीति क्‍या होनी चाहिए?

शेयर बाजार के बदहाल माहौल में अभी यह कहना काफी मुश्किल है कि आम निवेशक खरीद करें या बिकवाली। दुनिया भर में केवल शेयर कारोबार ही ऐसा व्‍यापार है जिसमें मंदी के समय में भी कमाई की जा सकती है। मैं सब कुछ कहने के पहले यह कहना चाहूंगा कि मैं नसीहत देने की बात नहीं करता, गलतियों को बताकर और दुखी नहीं करना चाहता। प्रवचन देना आसान है लेकिन उन पर अमल करना काफी मुश्किल है, धारा में बहते समय अच्‍छा लगता है लेकिन उसके विपरीत जाने का मन लाखों में से किसी एक का ही होता है। अभी परिस्‍थितियां बदली हैं, ऐसे में सभी को क्‍या करना चाहिए उसे बताने का प्रयास कर सकता हूं। आम निवेशक को अपनी मनोवृत्ति और सोच बदलना पड़ेगी। मंदी में मंदी और तेजी में तेजी का सिद्धांत अभी सही बैठता है, वर्तमान में शेयर के साथ फिक्‍स ब्‍याज वाले इंस्‍ट्रुमेंट, बैंक सावधि जमा, पोस्‍ट आफिस स्‍कीम, कमोडिटी आदि में कुछ पैसा लगाना चाहिए।

रणनीति बनाने से पहले अपने पास रखें शेयरों का अवलोकन करें, उनके फंडामेंटल, डिवीडेंट रिकॉर्ड के साथ कंज्‍यूमर में उनकी मांग को देखना पड़ेगा‍ कि वे ही शेयर आने वाले समय में चलेंगे। कुछ शेयरों का टेम्‍प्रेचर, उतार चढ़ाव या एक सप्‍ताह की गतिविधियों को देखकर अपने पास का माल बेचें एवं बड़ी गिरावट के दिन उसे कवर करें। इंट्रा डे कारोबार से छोटे निवेशक अभी दूर रहें, मैं इससे सहमत नहीं हूं। मानीटर के सामने बैठकर एक या दो फीसदी के लाभ नुकसान पर शाम को निल पोजीशन करके डेली कारोबारी चल सकते हैं। फ्यूचर की जगह ऑप्‍शन में कालपुट में हैजिंग के साथ कम मुनाफे में सौदा करें। अगर पैसा डुबाने की हिम्‍मत हो तो फ्यूचर में खेले अन्‍यथा अभी नकदी लेकर बैठना ज्‍यादा मुनासिफ है या फिर म्‍युचुअल फंडों के फ्लोटर कैश फंड में पैसा डाले।

शेयर बाजार में रिकवरी के लिए सरकार की ओर से क्‍या कदम उठाए जाने चाहिए। विदेशी निवेशकों के साथ देसी निवेशकों का भरोसा हम उभरते बाजार में कैसे लौटा सकते हैं?


सरकार को चाहिए कि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली पर प्रतिबंध (टाइम बाउंड लाग इन पीरियड) लगाना चाहिए। भारी गिरावट के समय दुनिया के कुछ देशों ने ऐसा किया था। हैवीवेट शेयरों के साथ जिन शेयरों में वोल्‍यूम के साथ स्‍पेक्‍युलेशन (भारी उतार चढ़ाव) हो रहा है, उन पर नजर रखें एवं एक्‍सचेंज से सौदों की जानकारी लें। फ्यूचर में मंदी पर मार्जिन बढ़ा दें एवं एक्‍सपायरी के एक सप्‍ताह पूर्व कटान और बाद के एक सप्‍ताह में डिलीवरी अनिवार्य कर दें। छोटे निवेशकों के लिए मिनी लॉट कर दें जिसमें डिलीवरी अनिवार्य हो जिससे अमुक समय तक रखने की मानसिकता बनेगी। रेग्‍युलेटरी को पांच से दस फीसदी का सर्किट सभी स्‍टॉक पर अनिवार्य करना चाहिए। कुछ स्‍टॉक की डिलीवरी एक निश्चित समय के बाद करें जिससे सट्टेबाजी कम होगी एवं हम धीरे धीरे इस मंदी से उबर जाएंगे।

लांग टर्म में कौन कौन से सैक्‍टर बेहतर हो सकते है और लांग टर्म की परिभाषा क्‍या है? इन दिनों कारगर नीति क्‍या है। इंट्रा डे या पोजीशन लेकर चलना?

लांग टर्म अभी के समय और परिस्थिति को देखकर बदल गया है। आज हम यह चार से पांच साल का मानते हैं लेकिन भारत में इसके पहले भी तेजी आ सकती है तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। परमाणु बिजली, इंफ्रा, एफएमसीजी, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, सीमेंट सैक्‍टर अच्‍छे लगते हैं। लेकिन निवेशक के लिए अभी भी खरीददारी के लिए रुकना फायदेमंद साबित हो सकता है। पेन्‍नी स्‍टॉक को हाथ बिल्‍कुल न लगाएं। निवेशकों के लिए कारगर नीति यही है कि अपने पास रखें शेयरों का अवलोकन करें एवं उन्‍हीं में बिकवाली-खरीद करें। नया पैसा लगाने या एवरेज करने के लिए 6500-7000 के नीचे सेंसेक्‍स या 2250 के नीचे निफ्टी का इंतजार करें और निवेश को दस हिस्‍सों में बांटकर शुरुआत करें। आवेश में आकर सट्टेबाजी करने से बचें। अगर नुकसान होता है तो वापस बाहर निकलें, बाजार में जरुरी नहीं कि मुनाफा हो। नुकसान खाकर भी बाजार का अनुभव किया जा सकता है और बाजार में मंदी करके भी पैसे बनाए जा सकते हैं। स्‍टॉप लॉस का प्रयोग करके फ्री की टिप्‍स या अफवाह-मिर्च वाले शेयर न खरीदें।

मंदी से उबरने के लिए और क्‍या प्रयास हो सकते हैं?

हम एफआईआई को प्राइवेट प्‍लेसमेंट और पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर जो कम से कम दो-तीन-पांच वर्ष के हो, प्रस्‍ताव देना चाहिए जिससे हमारे देश की कंपनियों और सरकार के पास निश्‍चित समय तक पैसा होगा एवं वैसी ही प्‍लानिंग होगी। इससे खरीददार एफआईआई को निश्चित मुनाफे के साथ दीर्घ अवधि तक माल रखना पड़ेगा जिससे हल्‍की डिमांड बढ़ेगी। सरकार को गृह निर्माण क्षेत्र को विशेष पैकेज के साथ एक बड़ी टीम इसके उद्धार के लिए जिससे जनता में इनकी डिमांड बढ़े एवं नई स्‍कीम कम ब्‍याज और उनकी मांग बढ़ानी पड़ेगी जिसके कारण सभी क्षेत्रों में उत्‍पादन एवं रोजगार में बढ़ोतरी होगी। इससे सुधार का एक दौर तेजी से चालू होगा और विकासशील देश होने के नाते हमारी अर्थव्‍यवस्‍था पर भरोसा बढ़ेगा। जहां विदेशों में कम ब्‍याज पर लोग संतुष्‍ट है तो भारत में उससे ज्‍यादा रिटर्न की क्षमता है और हमने यह दुनिया को दिखा दिया है।

मेरा अनुभव कहता है कि हम उच्‍च स्‍तर से जब धीरे धीरे नीचे आए जिसमें लगभग 13-14 महीने लगे, कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि बाजार से दूर हो जाए। क्‍योंकि हमने बसंत देखा था लेकिन अब अनुभव यह कहता है कि चक्रव्‍यूह से निकलना आना चाहिए। हम विश्‍व में आई खतरनाक मंदी के धुंए से भी खांस रहे हैं। जब हमारे यहां उसका असर पूर्ण रुप से आएगा तो हमें अन्‍य मुद्दे जैसे बेरोजगारी, इम्‍पोर्ट-एक्‍सपोर्ट में कमी, करेंसी का डिवेल्‍यूएशन से भी जूझना पड़ेगा।

हमें लड़ने के लिए राहत पैकेज के अलावा भी अन्‍य उपाय सम्मिलित रुप से खोजने होंगे। इसलिए अभी भी समय है, तैयार रहें। अगर चूक गए तो उसका असर सीधा शेयर बाजार एवं देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा और ऐसा न हो कि हम जापान की तरह काफी पीछे चले जाएं। जहां तक शेयर बाजार का प्रश्‍न है अभी भी सभी को शंका है कि कहीं और न दब जाएं। वैसे अभी सभी लोग मंदी के रथ पर सवार हैं। एक बड़ी रिलीफ रैली शार्ट कवरिंग की अगर आती है तो लगभग एक हजार अंकों तक की हो सकती है, का इंतजार कर सकते हैं। लेकिन उस समय आप बाहर होने की हिम्‍मत करें क्‍योंकि क्रिकेट और शेयर बाजार में कब कैसे और क्‍या हो जाए अनिश्चित रहता है।



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