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अगले छह महीने में सेंसेक्स 20 हजार: किशोर ओस्तवाल |
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मुलाकात | द्वारा/by : रजनीश कांत | सोमवार , 10 अगस्त 2009 |
भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स अगले छह महीने में 20 हजार अंक को छूने का माद्दा रखता है। शेयर बाजार में अभी भी कम निवेश हुआ है एवं अभी और निवेश होना बाकी है। बी ग्रुप के शेयर को अभी भी ऊपर आने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। निवेशकों को वैल्यू स्टॉक में निवेश करने से पहले रिसर्च प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए। अभी भी भारी डिस्काउंट पर अच्छी इंडस्ट्री और कंपनियों के शेयर मौजूद हैं। यह मानना है कि सीएनआई रिसर्च लिमिटेड, मुंबई के प्रबंध निदेशक किशोर ओस्तवाल का। किशोर ओस्तवाल से मोलतोल संवाददाता रजनीश कांत ने शेयर बाजार के भविष्य और मिड कैप शेयरों में निवेश रणनीति को लेकर बात की। पेश है बातचीत के खास अंश:
भारतीय शेयर बाजार में केवल नौ हफ्तों में ही 60 फीसदी तक रैली देखी गई। क्या आपको लगता है कि यह रैली जारी रहेगी या फिर बाजार ओवरहीटेड हो गया है ?
बाजार में अभी भी कम निवेश हुआ है एवं अभी और निवेश होना बाकी है। आज की तारीख तक अगस्त सीरिज के फ्यूचर्स में ओपेन इंटरेस्ट 53 हजार करोड़ रुपए का है जिसमें से स्टॉक फ्यूचर्स केवल 23 हजार करोड़ रुपए का है। अभी भी 400-500 अंकों के करेक्शन की संभावना है जिसे रूटीन करेक्शन समझना चाहिए। मुझे भरोसा है कि बाजार अगले छह महीने में 20 हजार अंक तक पहुंच जाएगा।
इस रैली के डाउनसाइड रिस्क क्या हैं?
खुदरा निवेशक इस रैली का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि वे हरेक तेजी पर मुनाफा वसूली कर रहे हैं और इस तरह से यह कोई बड़ा डाउनसाइड रिस्क नहीं हो सकता है। इसकी संभावना है कि हम नौ फीसदी की जीडीपी दर पा लें और राजकोषीय घाटे को पांच फीसदी के नीचे ले आएं। इसकी संभावना है कि गैर-योजनागत व्यय में से करीब एक लाख करोड़ रुपए हम बचा लें। यह सब बाजार के लिए अच्छे संकेत हैं।
निवेशकों को नई और ताजा खरीदी के लिए क्या करेक्शन का इंतजार करना चाहिए?
अब तक की रैली एफआईआई और अमीर निवेशकों के लिए है क्योंकि यहां एफआईआई और छोटे एवं खुदरा निवेशकों के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है। ए ग्रुप के लिए कोई बैरियर नहीं है, जबकि बी ग्रुप को 5-20 सर्किट लिमिट को देखना पड़ता है। सेंसेक्स एक सत्र में 21 फीसदी तेज हुआ तो तो सभी ए ग्रुप के शेयर 100 से 300 फीसदी तक उछले जबकि बी ग्रुप के शेयर को अभी भी ऊपर आने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अभी भी बहुत सारे अनछूए पहलू हैं। निवेशकों को वैल्यू स्टॉक में निवेश करने से पहले रिसर्च प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए। अभी भी भारी डिस्काउंट पर अच्छी इंडस्ट्री और कंपनियों के शेयर मौजूद हैं।
क्या बाजार नियर टर्म पर ज्यादा फोकस कर रहा है? सीमेंट और ऑटो स्टॉक्स इन कंपनियों के पिछली तिमाही के बेहतर डिस्पैच और बिक्री नंबर आने से बढ़े हैं?
हां, ऑटो का काफी बड़ा रनअप है और इसलिए इसकी ऊपरी सीमा सीमित है। सीमेंट के साथ ओवर कैपिसिटी का खतरा है और इस समय इसकी कीमत भी काफी अधिक है। अगर कोई निवेशक जो केवल कमोडिटी स्टॉक में निवश करना चाहता है, मेरे ख्याल से उसे सीमेंट सैक्टर में निवेश करना चाहिए।
किन सैक्टरों के मिड कैप शेयर एक निवेशक को चुनने चाहिए, जो कि लंबे समय के अलावा शॉर्ट टर्म में भी ज्यादा रिटर्न दे सके ?
शिक्षा, इंश्योरेंस, मेटल, माइनिंग, फर्टिलाइजर, कैमिकल्स, ग्लास, इंफ्रा, रियल्टी, सिगरेट, चाय, तेल, ऑफशोर विशेषकर गारवेयर, सर्विस प्रोवाइडर, ऑयल एवं गैस, टेलिकॉम, पीएसयू, बैंकिंग, पावर, प्राइवेट बैंकिंग, ऑटो कंपोनेंट। आईटी और सीमेंट को नजरअंदाज कर सकते हैं।
निवेशक बेहतर रिटर्न लॉर्ज कैप शेयरों में पाते हैं या मिड कैप में ? यदि मिड कैप में बेहतर रिटर्न मिलता है तो इसकी वजह क्या है?
निवेशकों का अलग-अलग वर्ग होता है। लार्ज कैप को 30 फीसदी के रिटर्न के साथ खुश होना चाहिए, जबकि मिड कैप एक साल के भीतर 60 से 100 फीसदी के रिटर्न की उम्मीद करते हैं। रिस्क जितना ज्यादा होता है, रिटर्न भी उतना ही अधिक होता है। यहां तक की कुछ निवेशक स्मॉल कैप शेयर में निवेश करके भी अधिक रिटर्न पा सकते हैं।
डिसक्लेमर: किशोर ओस्तवाल का इस साक्षात्कार के दौरान जिन स्टॉक्स की चर्चा हुई है, उनमें से किसी में भी एक्सपोजर नहीं है।
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आखरी बार संपादन किया गया ( सोमवार , 15 मार्च 2010 )
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