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कहीं आप भी बफेट की गलती तो नहीं दोहरा रहे ! |
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खास फीचर | द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता | शनिवार , 19 सितम्बर 2009 |
वारेन बफेट ने अपना पहला निवेश 11 साल की उम्र में किया था और इसके लिए उन्होंने अपनी साइकिल बेच दी थी, बफेट को बेहद अफसोस है कि उन्होंने निवेश की शुरूआत पहले क्यों नहीं की। भारत जैसे देश में जहां सेटलमेंट में लंबा वक्त लग जाता है निवेश संबंधी जागरूकता और भी देर से जागती है इसकी वजह से निवेशक लंबा वक्त गंवा देते हैं और पावर आफ कंपाउंडिंग अर्थात चक्रवृद्धि ब्याज में अभिवृद्धि की संभावनाओं को खो देते हैं।
निवेश का कोई भी स्कूल हो चाहे वह बायल हो अथवा फ्रेंकलीन हों, शुरूआती दौर में अधिकतम निवेश इक्विटी में करने की सलाह देते हैं इसका कारण दीर्घावधि में इक्विटी द्वारा दिया गया अधिकतम रिटर्न तो है ही, चक्रवृद्धि ब्याज की संभावनाओं का लाभ उठाना भी इसके पीछे की बुनियादी वजह है। शुरूआती दौर में अधिकतम निवेश फाइनेशिंयल प्लानिंग का ऐसा फार्मूला है जिसकी वजह से बड़ी बचत का सपना पूरा करना संभव है।
शुरूआती दौर में अधिक बचत के फायदेः
शुरूआती दौर में अधिक बचत के फायदे वैसे ही हैं जैसे किसी कंपनी को अपने विशेष ब्रांड की इमेज तैयार करने पर होते हैं। जैसे कोक ने ठंडा मतलब कोका कोला का स्लोगन दिया अथवा डालडा, वनस्पति घी का पर्याय हो गया। फंडा यह है कि एक बार आप ब्रांड इमेज तैयार करने में सफल हो जाते हैं तो भविष्य में ज्यादा मशक्कत की जरूरत नहीं होती। वैसे ही निवेश के मामले में भी है आप अगर शुरूआती दौर में अधिक निवेश करने में सफल हो गए तो चक्रवृद्धि ब्याज का ब्याज आपको दीर्घावधि के लिए सुरक्षित कर देगा।
उदाहरण के लिए आपने दो करोड़ रूपए का लक्ष्य रखा है और मान लीजिए कि आप इक्विटी जैसे माध्यम में निवेश कर रहे हैं जो आपको कम से कम 12 प्रतिशत तक औसत रिटर्न देने की क्षमता रखता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप यदि शुरूआती दौर में कुछ ज्यादा बचत करे तो लगभग आधे समय में आपका निवेश लक्ष्य पूरा हो सकता है। उदाहरण के लिए आप 5600 रुपए हर महीने बचत करते हैं और किसी अच्छे फंड में यह राशि निवेश कर देते हैं। 12 प्रतिशत ब्याज के आधार पर दो करोड़ का लक्ष्य पूरा करने में आपको 30 साल का वक्त लग जाएगा, जबकि अगर आप निवेश राशि में एक हजार रुपए की वृद्धि कर दें अर्थात 6600 रुपए हर महीने बचत करें और 15 साल बाद मासिक बचत बंद कर दें और निवेशित राशि को अपने आप बढ़ने दें तो भी 30 साल के बाद आपकी राशि दो करोड़ से काफी अधिक हो जाएगी।
वित्तीय सलाहकार मानते हैं कि अधिकतर निवेशक चक्रवृद्धि ब्याज के पक्ष को गंभीरता से नहीं लेते जिसकी वजह से सबसे अच्छे निवेश माध्यम का चुनाव करने के बावजूद उनका निवेश लक्ष्य ऐसे लोगों के मुकाबले कम ही रहता है जो शुरूआती दौर में अधिकतम बचत निवेश में लगाना पसंद करते हैं।
बिग पुश की थ्योरी यहां भी कारगरः
जैसे बीमार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सामान्य प्रयत्न प्रभावी नहीं होते और बिग पुश थ्योरी के अनुकूल पूरी शक्ति झोंकनी होती है वैसा ही फाइनेंस की दुनिया में भी है। यहां पर भी शुरूआत में की गई अधिकतम बचत बेहद कारगर होती है और दीर्घावधि में चक्रवृद्धि ब्याज की दृष्टि से यह बेहद आकर्षक होती है इसलिए निवेश का पहला फंडा ही यह है कि अपने शुरूआती वर्षों में बचत के अधिकतम निवेश का ध्यान रखें।
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आखरी बार संपादन किया गया ( शनिवार , 19 सितम्बर 2009 )
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