Register
अक्षर :  


कहीं आप कम इंश्योरेंस की बीमारी की गलत दवा तो नही ले रहे! छापें
  
खास फीचर |  द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता |  सोमवार , 28 सितम्बर 2009
कम इंश्योरेंस लेने की बीमारी का मुहावरा गढ़कर रेलीगेयर ने अपनी कमाई तो बढ़ाई ही दूसरी कंपनियों के लिए भी आय के रास्ते खोल दिए। निवेशकों की नई पीढ़ी अब केवल बीमा करा लेने तक अपने कर्त्वयों की इतिश्री नहीं मानती अपितु अब वह सुरक्षित स्तर तक बीमा कराने पर विचार कर रही है।

कंपनियों ने इसके लिए इंश्योरेंस केल्कुलेटर की सुविधा प्रदान की है जिससे झटपट आपके प्रोफाइल के मुताबिक आपकी बीमित राशि का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके लिए सबसे सुविधाजनक पोर्टल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने तैयार किया है जिसमें शानदार विजुअल बेसिक के माध्यम से आपके फैमिली बैकग्राउंड, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य संबंधी स्थिति आदि तमाम बातों का अध्ययन कर आपके लिए आवश्यक बीमित राशि का अनुमान लगाया जाता है।

निदान के तरीके में गड़बड़ीः


लोग भले ही कम इंश्योरेंस लेने की बीमारी के बारे में जागरूक हो गए हों लेकिन इस बीमारी के उपचार का जो तरीका अपना रहे हैं उससे दीर्घावधि में उनकी बीमारी सुधरने वाली नहीं। दरअसल अधिकतर कंपनियां कम इंश्योरेंस लेने की बीमारी का इलाज यूलिप योजनाओं के माध्यम करने की सलाह दे रहे हैं जिसमें थोड़ी सी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए निवेशक को अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा लगाना पड़ता है।

छोटे शहरों में ही नहीं, महानगरों में भी अधिकतर निवेशकों ने चिल्ड्रन प्लान, रिटायरमेंट प्लान जैसी यूलिप योजनाएं ले रखी है और इन्हें भरोसा है कि इन विविध योजनाओं के माध्यम से उन्हें जरूरत के समय में निवेश सुरक्षा मिलेगी। एक निजी कंपनी ने 40 हजार रुपए के आसपास मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कुछ व्यक्तियों (लगभग 30 से 35 आयुवर्ग के लोग) के पोर्टफोलियो का अध्ययन किया। कंपनी ने पाया कि इनमें से अधिकांश लोग 10 हजार रुपए तक बचत करने में सक्षम होते हैं बाकी की रकम होम लोन की किश्त पटाने में एवं अन्य खर्चों में निकल जाती है। कंपनी ने पाया कि इनमें से अधिकांश ने यूलिप प्लान लिये हुए हैं और इनमें से अधिकांश की बीमित राशि 10 लाख रूपए से भी कम है।

अगर महंगाई की दर साढ़े छह प्रतिशत की औसत दर से बढ़े तो 25 हजार रुपए से 30 हजार रुपए खर्च करने वाले किसी परिवार को 30 साल बाद लगभग डेढ़ लाख से पौने दो लाख रुपए मासिक की जरूरत होगी। और इस बीच यदि दुर्भाग्यजनक रूप से अगर निवेशक की मौत हो जायेगी तो उसके परिवार के लिए केवल चार महीने तक का खर्च चलाने के लिए ही रकम बचेगी। यद्यपि यूनिट लिंक्ड प्लान होने की वजह से उन्हें बाजार का रिटर्न भी मिलेगी लेकिन यूलिप की कमीशन स्ट्रक्चर ऐसी है कि इसमें निवेशक के लिए बेहतर रिटर्न की कोई संभावनाएं नही बचती।

निदान का सही तरीकाः

कम इंश्योरेंस लेने की बीमारी का सबसे आसान और वित्तीय दृष्टि से सबसे सुविधाजनक इलाज है टर्म प्लान। अगर आप साल भर का केवल 10 हजार रुपए निवेश करते हैं तो आपको 30 साल की अवधि के लिए 50 लाख रूपए का बीमा प्राप्त हो जाता है और अगर कोई दुर्भाग्यजनक हादसा हो जाता है तो अगली किश्तें पटाए बगैर आपको बीमित राशि मिल जाती है। हादसा न होने की स्थिति तो आप भगवान से रोज ही मनाते हैं तो टर्म प्लान आपको हर तरह से सुरक्षा प्रदान करता है।

अगर आप बीमित अवधि के बाद तक सरवाइव करने में सफल रहे तो आप इतनी पूंजी अर्जित कर ही लेंगे कि 30 साल तक पटाये गये मामूली तीन लाख रूपए तक के प्रीमियम के डूब जाने से उत्पन्न हुए नुकसान को आसानी से सह लें। अगर यह आसान सच निवेशक जान लें फिर वह समझ जायेंगे कि अब तक मनी बैक के झांसे में फंसकर वह कितने पैसे बाजार में फूंक आए।

टिप्पणियाँ (0)add
टिप्पणी लिखें
quote
bold
italicize
underline
strike
url
image
quote
quote
smile
wink
laugh
grin
angry
sad
shocked
cool
tongue
kiss
cry
smaller | bigger

security image
दिखाये गये अक्षर लिखें


busy
 
< पिछला   अगला >




mobile.jpg
 rss-logo.jpg  feedmail-logo.jpg  twi-logo.jpg
nivesh.jpg

दलाल स्‍ट्रीट: सितारे थोड़ा कमजोर करेंगे बाजार को

share-jyotish.jpg
स्‍थाई समस्‍या की कोई वजह अभी नहीं दिखाई दे रही, ग्रहों की खास स्थिति से अगले सप्‍ताह दलाल स्‍ट्रीट को एक संकट से अवश्‍य जूझना पडेगा...  

महंगाई एक त्‍योहार है

dhanteras.jpg
महंगाई तो मन के रोम रोम को बींधती है। महंगाई से बचना जिन्‍दगी में उ‍ल्‍लसित होना है, न कि खुजलाहट का सबब बनना है...
पढ़ें...

सेंसेक्‍स: 16585 टूटने पर बेच डालें सारे शेयर

share-up.jpg
वैश्चिक बाजारों का सेंटीमेंट व्‍यापक असर छोड़ गया और फिर से 17 हजार का स्‍तर आ गया,  17 हजार के ऊपर सेंसेक्‍स बंद होता तो सेंटीमेंट अधिक सुधरता ...

शेयर बिक्री ऑफर बढ़ सकते हें इस साल: सिटीग्रुप

bse.jpg
भारतीय शेयर और शेयरों से जुड़े़ ऑफरिंग इस साल एक तिहाई से भी ज्यादा बढ़ सकते हैं, क्योकि कंपनियां और सरकार बढ़ती घरेलू पूंजी का लाभ उठाना चाहते हैं और अर्थव्यवस्था भी सुधर रही है...