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दिवाली ऑफर में घर खरीदना कितना सही? |
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खास फीचर | द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता | शनिवार , 17 अक्टूबर 2009 |
लगभग साल भर फर्श पर रहने के बाद रियल इस्टेट सैक्टर इन दिनों पुनः अर्श पर पहुंचने की तैयारी कर रहा है। जहां रियलिटी कंपनियों की स्थिति में सुधार हुआ है वहीं साल भर पहले होम लोन लेने का निर्णय त्याग चुके उपभोक्ता अब पुनः अपने सपने को सच करने की तैयारी कर रहे हैं और स्वाभाविक सी बात है कि दीपावली इसके लिए सबसे सुनहरा वक्त होता है क्योंकि यह शुभ तो है ही, बिल्डर्स भी अच्छे-खासे ऑफर लाते हैं। तो क्या यह माना जाए कि मकान में निवेश करने का सही वक्त आ गया है?
हड़बड़ी में निर्णय न करें:
मकान खरीदना अथवा होम लोन लेने का फैसला किसी परिवार के लिए सबसे बड़ा वित्तीय निर्णय करना होता है क्योंकि आने वाले एक दशक से अधिक समय तक इसकी ईएमआई का भार चुकाना होता है तो स्वाभाविक सी बात है कि यह कोई ऐसा फैसला नहीं है कि आपको रेफ्रिजरेटर खरीदना है अथवा टीवी लेनी है जिसके किसी मॉडल में आपको 10 फीसदी डिस्काउंट एवं ढेरों उपहार मिल रहे हों।
उपभोक्ताओं को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि बिल्डर्स द्वारा दिया जा रहा डिस्काउंट वैसा ही नहीं है जैसाकि डिश टीवी द्वारा दिया गया। अगर निवेशक यह निर्णय कर रहा है तो इसकी आशंका भी बनती है कि वह वित्तीय बोझ से इतना लद जाए कि आगे विश ही नहीं कर पाए।
ब्याज दरों पर ध्यान दें:
रियल एस्टेट से जुड़े निवेश सलाहकार मानते हैं कि बिल्डर्स द्वारा दिए जा रहे ऑफर रियलटी के संबंध में बिल्कुल ही नाकाफी होते हैं उदाहरण के लिए अगर आप 20 लाख का कोई प्रोजेक्ट फाइनल कर रहे हैं और उसमें अगर आपको बिल्डर 10 हजार रुपए की छूट देता है तो यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। अगर आपको प्रोसेसिंग शुल्क से मुक्ति मिल भी जाए तो भी यह छूट उतनी महत्व की नहीं है। यद्यपि यह छूट महत्वपूर्ण हो सकती है जब ब्याज दरों की स्थिति आपके निर्णय के पक्ष में हो। वैसे स्टॉक मार्केट में आए जबरदस्त क्रैश का सबसे ज्यादा असर रियलटी सैक्टर में ही पड़ा। फिलहाल स्थिति देखें तो ब्याज दरें शीर्ष में पहुंचने के बाद से 4 फीसदी कम है जो महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रापर्टी की कीमतें भी शीर्ष से 10 प्रतिशत और कुछ मामलों में 25 प्रतिशत तक फिसली हैं।
बिल्डर की वित्तीय और विधिक स्थिति पर भी ध्यान दें:
लगभग साल भर पहले तरलता के संकट से जूझ रहे रियलटी सैक्टर के लिए फिलहाल स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है इसके बावजूद संकट पूरी तौर पर खत्म नहीं हुआ है अत: यह जरूर देखें कि जो प्रोजेक्ट बिल्डर लेकर चल रहा है उसके पीछे वित्तीय स्रोत क्या है। दूसरा यह भी देखना जरूरी है कि प्रापर्टी के साथ सारे लीगल डाक्यूमेंट मौजूद हों और बिल्डर के पास सारे क्लियरेंस हों।
कंसट्रक्शन आधारित भुगतान करें:
बिल्डर्स के प्लान को पसंद करने और इसे तय करने के बाद भुगतान के लिए कंसट्रक्शन आधारित पेमेंट करें। इससे यह होगा कि बिल्डर प्रोजेक्ट को बढ़ाने की दिशा में शीघ्रता करेगा और आपका पैसा भी फंसने से बच जाएगा। अक्सर यह देखा गया है कि बहुत से बिल्डर डेडलाइन पर अपना काम पूरा नहीं करते। उपभोक्ता को देखना चाहिए कि अगर बिल्डर कंसट्रक्शन आधारित भुगतान पर राजी न हो तो ऐसी संभावना पर विचार करे कि जिससे डेडलाइन पर काम न होने से पेनाल्टी लगाई जा सके।
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