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इंडिया इंक के लिए बुरा दौर खत्म: अलेक्स मैथ्यू छापें
  
मुलाकात |  द्वारा/by : रजनीश कांत |  रविवार , 06 दिसम्बर 2009
Alex_Mathew.jpgउम्मीद से बेहतर जीडीपी नंबर सहित कई ऐसे कारक हैं जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का पुख्ता संकेत देते हैं। लेकिन दुबई वर्ल्ड जैसी घटना देश के अर्थशास्त्रियों के साथ–साथ बाजार के जानकार और निवेशकों के मन में मंदी की आशंका पैदा कर देती है। लेकिन जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेस, मुबई के रिसर्च प्रमुख अलेक्स मैथ्यू का मानना है कि अब भारतीय कंपनियों के लिए बुरा दौर बीत चुका है। अलेक्स मैथ्यू से दुबई ऋण संकट की ताजा स्थिति, भारतीय कंपनियों की तीसरी तिमाही के नतीजे सहित कई मुद्दों पर बात की मोलतोल संवाददाता रजनीश कांत ने। पेश है बातचीत के खास अंश...
 
दुबई ऋण संकट को अब आप कैसे देखते हैं?

दुबई ऋण संकट खतरनाक नहीं है। लेकिन दुबई के वित्तीय संकट को दूर करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के प्रति सचेत रहना चाहिए और दुबई वर्ल्ड के पुनर्गठन के परिणाम पर नजर रखनी चाहिए।

ऐसे माहौल में आप निवेशक को क्या सलाह देंगे?

दुबई संकट का हमारी अर्थव्यवस्था पर वास्तविक असर से ज्यादा असर का अनुमान लगा लिया गया था। कुछ कंपनियों के दुबई में या खासकर ऋण संकट ग्रस्त दुबई वर्ल्ड के साथ कारोबार है। हमारी ज्यादातर कंपनियों ने मध्य-पूर्व के साथ करार किया है जहां आर्थिक गतिविधियां बेरोक-टोक जारी है। इसलिए चिन्ता की कोई बात नहीं है।  

निफ्टी में अगले तीन से छह महीनों में क्या लेवल आप देखते हैं? 

निफ्टी अगले तीन से छह महीनों के दौरान 5500-6000 अंक तक जा सकता है।

आपके पसंदीदा सैक्टर्स और स्टॉक्स कौन-कौन हैं?

मेरे पसंदीदा सैक्टर्स बैंकिंग, फार्मास्युटिकल्स और ऑटोमोबाइल्स है। जहां तक स्टॉक्स की बात है तो मैं एसबीआई, ऐक्सिस बैंक, रैनबैक्सी, अरबिन्दो फार्मा, मारुति, एमएंडएम और बजाज ऑटो में निवेश करना पसंद करूंगा।

अर्थव्यवस्था में सुधार की बात की जा रही है। आप इस खबर को लेकर कितने आश्वास्त हैं?

हमारी अर्थव्यवस्था चरणबद्ध तरीके से विकास कर रही है और अगले एक-दो तिमाही में आठ फीसदी सालाना विकास दर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। प्रोत्साहन पैकेज से अर्थव्यवस्था को विकास करने में काफी मदद मिली है।   

भारतीय कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए आईपीओ सहित सभी उपाय अपना रही हैं? लेकिन आईपीओ में खुदरा निवेशकों एवं कर्मचारियों की भागीदारी काफी कम है। आपकी नजर में इसके क्या कारण हैं?

इन दिनों बहुत सारी कंपनियों के आईपीओ निवेशकों को आकर्षित करने विफल साबित रहे हैं जिसका कारण है कंपनियों की एग्रेसिव प्राइसिंग। एक बार जब बाजार का रुझान नरम हो जाए, तो बहुत सारी कंपनियां तुलनात्मक रूप से कम प्राइसिंग के साथ आईपीओ लाएगी जो कि खुदरा निवेशकों को आकर्षिक करेगा। 

तीसरी तिमाही में कॉर्पोरेट इंडिया का प्रदर्शन कमाई के लिहाज से आप किस तरह देखते हैं?

अब पीछे देखने की जरूरत नहीं है। भारतीय कंपनियों के लिए बुरा दौर समाप्त हो गया।

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