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काले का बोलबाला, गोरे का मुंह काला छापें
  
खास फीचर |  द्वारा/by : अविनाश वाचस्‍पति |  रविवार , 03 जनवरी 2010
व्‍यंग्‍य

avinash-vachaspati.jpgआज दुनिया भर में काले बनने बनाने का फितूर छाया हुआ है। अभी कुछ अर्सा पहले तक गोरेपन को कंपनियां तरह तरह की ब्रांडिड क्रीमों के जरिए भुना रही थीं। उन सभी को सावधान हो जाना चाहिए। स्‍याह काले, काले फेयर एंड लवली जैसी क्रीमों को अपने चेहरों पर पोतें और इतने गोरे हो जाएं कि गोरापन भी शर्मा जाए। अभी साल भर पहले अमरीका में ओबामा के राष्‍ट्रपति बनने से रंगों के क्षेत्र में जो काली क्रांति हुई है उसकी मिसाल अब बरसों नहीं मिलेगी। अब चहुं ओर काले का बोलबाला हो गया है। अगर ओबामा को इस बरस शांति का नोबेल पुरस्‍कार न मिला होता तो यह निश्चित है कि रंगों में रंग स्‍याह काला रंग कानोबेल पुरस्‍कार स्‍थापित कर अवश्‍य विशिष्‍ट नोबेल से सम्‍मानित किया जाता। पर अब न सही अगली बार सही। अब कालेपन का कलहरा युग आ गया समझिए। हरी भरी सब्जियों का जमाना बीतने को है।

जल्‍दी ही काली काली जायकेदार पौष्टिक सब्जियां आपको सब्‍जी मंडी में चारों तरफ धूम मचाती मिलेंगी। काला पौष्टिकता और गुणवत्‍ता का पर्याय हो गया है। भारतीय वैज्ञानिक भी समय की नब्‍ज पहचान रहे हैं और समय की गति से तेज दौड़ने की कूबत रखते हैं। इसी का सुफल इलाहाबाद के कृषि विश्‍वविद्यालय केशोधकर्ताओं की मेहनत के रूप में सामने है। सफेद आलू से गुणवत्‍ता में कई गुना बेहतर काले आलू की खेती में सफलता प्राप्‍त करना है। एंटीआक्‍सीडेंट से भरपूर होने से इसमें बढ़ती आयु का असर और कैंसर का जोखिम कम करने की क्षमता भी है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि उन्‍होंने सबसे पहले सब्जियों के राजा आलू का रंग बदलकर होली खेली है। इसी का नतीजा है कि अब हरी सब्जियों में वो पौष्टिकता नहीं है जो काली काली सब्जियों के रेशे रेशे में घुली मिली है। इसकी वैज्ञा‍निक पुष्टि पिछले दिनों की जारी रिपोर्ट में की जा चुकी है। काला सदा से बुरे का बोध कराता रहा है। पर अब मुहावरे अपने पुराने अर्थों से बाहर आकर नए अर्थ देने लगे हैं। मुंह काला करवाना या मुंह काला होना अब सम्‍मान का सूचक बन गया है। अगर सदा से काला रहा जामुन अपनी बिरादरी की बढ़ोतरी पर इतराता है तो इसमें गलत क्‍या है ?

अभी तो सिर्फ आलू काला हुआ है। जल्‍दी ही आप किसानों के खेतों में, सब्‍जी मंडियों में सभी सब्जियों और फलों को स्‍वास्‍थ्‍य हितकारी काले से ओत प्रोत देखेंगे। काले टमाटर, काला घिया, काला टिंडा, काला काशीफल, काली भिंडी, काली शलजम, काली शिमला मिर्च इत्‍यादि सब काली हो जाएंगी और उन्‍हें खाने वाले उनके कालेपन पर फिदा झूमते दिखाई दिया करेंगे। मुंह काला करने और करवाने में सबको असीम आनंद की प्राप्ति होगी। मां अगर बेटी से जानना चाह रही है कि कलमुंही कहां पर मुंह काला करवाया है तो इसे बुरे अर्थों में तो अब कदापि मत लीजिएगा। हर कन्‍या के मन में एक अरमान पला करेगा कि कब मेरा मुंह काला होगा और उसके पूरा होने पर सभी आनंदित हुआ करेंगे। सच जो सदा से धवल रहा है, अपने को काला कहलवाने में गर्व महसूस करेगा। कालेपन का अहसास अद्भुत सौंदर्य की सृष्टि और वृष्टि करेगा। सच वही जो काला हो। बतर्ज दुल्‍हन वही जिससे कालापन भी शर्माये यानी सुर्ख काला। सब्‍जी वही पौष्टिक जो काली हो। दाल में कालेपन का बोलबाला, जिस घर में पूरी दाल काली उस के घर मनेगी दिवाली, जैसे नवीन मुहावरे सुनने को मिलेंगे। काली निराली सब्जियां। सब्जियों का कालापन गजब ढाएगा।

नए फिल्‍मी गीतों में सब्जियों का कालापन अपनी खूबसूरती के नए नए छंद, अलंकार रचेगा। काला अब काल नहीं, कलकल के मधुर नाद का अहसास दिलाएगा।  आप देखेंगे कि काले की किलकारी पर सारी सृष्टि मोहित हो रही है। काले की दीवानी दुनिया सारी। काली दीपावली भी अब शुभ का प्रती‍क बनती जा रही है।  काले में हैं गुण नेक। काला सहज स्‍वीकार्य बन रहा है। सफेद के बुरे दिन आ गए हैं। कालेपन की इस क्रांति को स्‍वीकारिए। काली कोयल की कूक से सभी हर्षाये हैं, उसकी निराली कूक से तो आमवृक्ष भी बौराता है तो आमजन कैसे बचा रह सकता है, उसी कूक का सम्‍मोहन अपनी मोहिनी में सभी को बांध रहा है।  इस कूक का असर खासजन पर भी समान प्रभावी है। काली कोयल को भी काले कौए का घोंसला ही सुहाता है जिसके भरोसे कोयल अपनी संतान को छोड़ देती है। यह काले पर काले के विश्‍वास की सनातन मिसाल है।

काला कुत्‍ता, काला बिच्‍छू, काला सांप, काला लंगूर, काला बंदर। अभी तक लाल पिछवाड़ा ही बंदर की विशेष पहचान रही है। अब जल्‍दी ही इस क्षेत्र में भी क्रांति आने वाली है काले पिछवाड़े वाले बंदर बहुतायत में उपलब्‍ध हों तो अचरज मत कीजिएगा। काले तिल की उपयोगिता से सभी परिचित हैं ही। काले चने से ही पौष्टिकता मिलती रही है। नयन भी काले ही गजब ढाते हैं तिरछी चितवन भी काली ही कहलाती है। सब्जियों में लाई जा रही यह काली क्रांति अंधेरे का वर्चस्‍व स्‍थापित कर रही है। देवताओं की काले पत्‍थर की मूर्तियां सदा से सौंदर्य उपजाकर, भक्‍तों के मन में आस्‍था जगाती रही हैं। अभी तो आलू काले हुए हैं। नेताओं के काले दिल तो पहले से ही कवियों को लिखने का भरपूर मसाला उपलब्‍ध कराते रहे हैं।

आप देखेंगे कि मकान, दुकान, बहुमंजिली इमारतें, हवाई जहाज, बसें, गाडि़यां सब काली नजर आएंगी। मेट्रो काली मिलेगी। इसे काली सड़कों का बढ़ता प्रभाव कहा जा सकता है। दिल जो नेताओं का काला होता है, अब वही लुभाएगा। वोटर उसी सदाशयता पर अपना वोट लुटाएगा। कालेपन का दीवाना हुआ है जग सारा। काले की बढ़ रही गरिमा है। विवाह के लिए काली कन्‍याओं की मांग में जोरदार इजाफा होते हुए सभी देखेंगे। काला सौंदर्य का नया प्रतीक बन उभर चुका है। काली विश्‍वसुंदरियों की प्रतियोगिताएं चर्चा में रहेंगी। करतूतें जो सदा से काली रही हैं अब लुभाया करेंगी। शरीर में बह रहा खून बगावत पर उतर आए और कालेपन के इस दौर में कहे कि लाल नहीं रहूंगा मैं। सबका खून काला हो गया है तो आप चौंकिएगा मत।

रंगों की दुनिया में काले रंग ने हलचल मचा दी है। काला सौंदर्य बोध के विशिष्‍ट प्रतिमान बना रहा है। काले केले, काले सेब, काले पपीते, काली नाशपाती, काला अमरूद और काला अनार – सब कालिमामय हो गये हैं। काला शक्ति की भीत और काला भक्ति की प्रीत के रूप में काला जादू सदा से सबके सिर चढ़कर बोलता रहा है पर अब इसमें हंगामे का आगाज हो चुका है।

लेखक हिंदी के जाने माने व्‍यंग्‍यकार हैं।

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