खास फीचर | द्वारा/by : मोलतोल न्यूज नेटवर्क | सोमवार , 25 जनवरी 2010
मुंबई। शेयर बाजारों में आई तेजी का लाभ उठाते हुए अनेक कंपनियों के प्रमोटरों ने अपनी शेयरधारिता में कमी की है। 31 मार्च 2009 और 31 दिसंबर 2009 को समाप्त तिमाहियों का विश्लेषण किया जाए तो यह साफ हो जाता है कि भारतीय कंपनियों में प्रमोटरों ने खुद का हिस्सा घटाया है। हालांकि इस अवधि में सेंसेक्स की कंपनियों की कीमत दो गुनी हो गई लेकिन प्रमोटरों की शेयरधारिता (शेयर होल्डिंग) में रुचि घट गई। प्रमोटरों द्धारा बेचे गए शेयरों के बड़े खरीददार विदेशी संस्थागत निवेशक, घरेलू संस्थागत निवेशक मुख्य लेवाल रहे।
31 दिसंबर 2009 को समाप्त तिमाही में 428 कंपनियों के उपलब्ध शेयर होल्डिंग आंकडों को देखें तो पता चलता है कि 154 कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम हुई है। हालांकि, कुछ कंपनियों के मामलों में यह हिस्सेदारी क्यूआईपी आने से कम हुई है। जिन कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम हुई है उनमें टेल्को, टिस्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस और डीएलएफ जैसी विख्यात कंपनियां शामिल हैं।
इंडियाबुल्स रियल इस्टेट, यूनिटी इंफ्रा, ओर्बिट कार्पोरेशन, शोभा डेवलपर्स, हिंदुस्तान कंसट्रक्शन जैसी कुछ कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी इस वजह से कम हुई कि संस्थागत निवेशकों को इक्विटी आधार बढ़ाने के तहत प्राइवेट प्लेसमेंट के माध्यम से शेयर जारी किए गए।
डीएलएफ में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 9.9 फीसदी कम हुई। प्रमोटरों ने इक्विटी आधार बढ़ाए बगैर फंड उगाहने के लिए संस्थागत निवेशकों को शेयर बेंचे। सुजलॉन एनर्जी, वोलटैम्प ट्रांसफार्मर्स, एआईए इंजीनियरिंग, श्री रेणुका शुगर्स, कोटक महिंद्रा बैंक में प्रमोटरों ने अपनी शेयरधारिता 4 से 13 फीसदी कम की। इन कंपनियों के प्रमोटरों ने अधिग्रहण के लिए कोष जुटाने, कर्ज चुकाने और लिक्विडिटी की जरुरतों को पूरा करने के लिए अपनी हिस्सेदारी बेची।
बीएसई-500 इंडेक्स में शामिल केवल आठ कंपनियों में ही प्रमोटरों ने 31 दिसंबर 2009 को समाप्त तिमाही में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। इन कंपनियों में फाइजर, नोवार्तिस इंडिया और इंडो टेक ट्रांसफार्मर्स शामिल हैं। आइडिया सेलुलर, इंडिया सीमेंट और कोटक महिंद्रा बैंक में प्रमोटरों द्धारा बेचे गए शेयरों के बड़े लेवाल छोटे निवेशक रहे।
भारतीय शेयर और शेयरों से जुड़े़ ऑफरिंग इस साल एक तिहाई से भी ज्यादा बढ़
सकते हैं, क्योकि कंपनियां और सरकार बढ़ती घरेलू पूंजी का लाभ उठाना चाहते
हैं और अर्थव्यवस्था भी सुधर रही है...