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निवेश में ज्‍योतिषी की भूमिका होती है प्रभावी छापें
  
खास फीचर |  द्वारा/by : पाराशर |  रविवार , 21 फ़रवरी 2010
jyotish-bachat.jpgजो लोग बाजार की गतिविधियों से नियमित रूप से जुड़े हैं उन्‍हें पता है कि बाजार पर लगातार निगाह रखने और खुद के इंट्यूशन से जो दांव लगाया जाए वही सटीक पड़ता है। इसमें कोई दूसरा निवेशक की मदद नहीं कर सकता। इसके बावजूद मैं कहना चाहूंगा कि पुराने निवेशकों को ज्‍योतिषियों की सलाह लेनी शुरू कर देनी चाहिए। इसके दो कारण हैं।

पहला प्‍वाइंट ज्‍योतिष के हित का है और दूसरा निवेशकों के हित का। हालांकि, ज्‍योतिष के क्षेत्र में इस संबंध में काफी काम हुआ है, लेकिन पिछले कुछ सालों में व्‍यवसाय के तरीके में प्रभावी बदलाव हुए हैं। इनमें सबसे अहम है निवेश का तरीका। यानि ऑनलाइन ट्रेडिंग। इसके कारण भावों के उतार-चढ़ाव के परम्‍परागत वातावरणीय कारक बदल गए।

अब बादलों को देखकर कोई यह नहीं कहता कि ग्‍वार के भाव उतर जाएंगे या किसी प्रॉडक्‍शन कंपनी की मजबूत स्थिति को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि इसके भाव निकट भविष्‍य में ऊपर ही जाएंगे। ऐसे में केवल ज्‍योतिष के ही भरोसे पूरे सही फलोदश किया जा सकना संदेह के घेरे में आ गया है। ऐसे में मैं चाहता हूं कि आप निवेशक हैं तो किसी भी ज्‍योतिषी से जुड़ें, लेकिन जुड़ें जरूर। हो सकता है शुरू में वह आपको अपेक्षित लाभ न दिला पाए लेकिन आपकी लगातार फीडिंग उसे गणना करने में सहायता करेगी और ज्‍योतिषी आपको कम से कम यह बता पाएगा कि आपको कब निवेश करना चाहिए और कब बाजार से बाहर का रास्‍ता देखना चाहिए।

दूसरा मुद्दा आपके खुद के हित का है। एक बार आपको पता चल जाए कि कौन से दिन आपके लिए बेहतर हैं और कौन से दिन आपको नुकसान हो सकता है तो समय पर सावधान हो सकते हैं। इसके लिए खुद ज्‍योषित सीखें तो बेहतर है वरना किसी सामान्‍य ज्‍योतिषी को पकडि़ए और उसे नियमित रूप से अपने निवेश और लाभ-हानि के बारे में अपडेट करें। जरूरी नहीं है कि आप उसे अपनी स्‍ट्रेटर्जी भी बताएं लेकिन निवेश के प्रकार और लाभ हानि के बारे में तो बात कही ही जा सकती है।

ज्योतिषी की जरूरत क्‍यों है- इसका स्‍पष्‍ट कारण यह है कि निवेश के शुरूआती दौर में आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता। और जो होता है वही आखिरी होता है। ऐसे में आपके विश्‍लेषण में आपका अवचेतन पूरा सहयोग कर रहा होता है। लंबे समय तक बाजार में बने रहने के कारण कई तरह के पूर्वाग्रह जुड़ जाते हैं और विश्‍लेषणों की धार भी कम हो सकती है। ऐसे में ज्‍योतिषी को साथ रखना फायदे का सौदा हो सकता है।

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