| निवेश जुआ नहीं है |
| निवेश पाठशाला | द्वारा/by : मोहन वर्मा | गुरुवार , 25 सितम्बर 2008 | |
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चौदहवां पीरियड अधिक जनसंख्या और तंबाकू खपत के अलावा भारत एक और मामले में केवल चीन से आगे और बाकी सबसे पीछे है। वह चीज है सट्टेबाजी। स्टॉक मार्केट भी प्राय: जुए से जोड़कर देखे जाते हैं। शेयर बाजार को बहुत लोग सट्टा बाजार और इसमें धन लगाने वालों को सटोरिए मानते हैं। लोगों को उनके बाप-दादे, शेयर-बाजार से सचेत रहने, दूर रहने की नसीहतें देते देखे जाते हैं। शायद इसीलिए अभी भारत में तीन फीसदी से भी कम लोग ऐसे हैं, जो किसी कंपनी के शेयर रखते हैं। इनमें भी महाराष्ट्र और गुजरात एवं कुछ दक्षिणी राज्यों की तुलना में मध्य और उत्तरी भारत के लोगों का प्रतिशत बहुत ही कम है। सट्टेबाज तो घुडदौड` या क्रिकेट-फुटबॉल आदि के मैच पर भी दांव लगाते हैं, जबकि वैसे ये केवल खेल हैं, मनोरंजन के लिए। पर जब इसमें पैसों का दांव लग जाता है, तो इसके साथ जुड़ जाता है जोखिम। शेयर-बाजार में कीमतों का उतार-चढा़व, लोगों में घबराहट पैदा करता है। ऐसे में अपनी पूंजी खोने का डर उनके कदम वापस खींच लेता है। लेकिन कीमतों की अस्थिरता में ही तो कमाई के अवसर छिपे हैं। बाजार के ऊपर जाने पर बेचकर और नीचे आने पर खरीद कर कमाई की जाती है लेकिन प्राय: लोग करते क्या हैं? जब सूचकांक लगातार ऊपर जा रहा होता है, तो वे भीड़ मानसिकता की देखादेखी अनाप-शनाप खरीदी करते हैं। आलोक पुराणिक का बयान है कि कीमतों का सूरज ऊपर चढ़ने पर खरीदार यूं उत्साहित होते हैं जैसे अब कभी रात होगी ही नहीं, और बाजार गिरने पर ऐसा निराश होते हैं, जैसे अब सवेरा ही नहीं होगा। लेकिन यहां रात भी होती है और सवेरा भी आ ही जाता है। एक पश्चिमी लेखक ने स्टॉक-मार्केट को सुपर-बाजार सरीखा बताया है, जहां निवेशक उल्टा व्यवहार करते हैं। यानी जब छूट की सेल लगती है और अच्छे-अच्छे शेयर डिस्काउंट पर मिलने लगते हैं तो निवेशक दूर भागते हैं और तेजी होने पर खरीदने के लिए मारामारी मचाते हैं। जाहिर है, तेजी में खरीदेंगे, तो मंदीमें घबराकर बेचेंगे भी। एक प्रसिद्ध निवेशक ने कहा है कि बाजार में आप बेचकर नहीं, खरीदने पर कमाते हैं। यानी किस कीमत पर क्या खरीद रहे हैं, यह सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। तेज खरीदकर आपाधापी में मंदा बेचकर बाजार से तौबा करने वालों की निगाह में ही यह जुआघर है, जो अपने हाथ जलाकर औरों को इससे दूर रहने की सलाह देते फिरते हैं। आपरेटरों की गतिविधियों और कीमतों की अस्थिरता की वजह से इस बाजार के बारे में कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं हो सकती। लेकिन अवांछित तत्व और भविष्यवाणियों के सही-गलत तुक्के तो आपको हर जगह मिलेंगे। जोखिम को सही परिप्रेक्ष्य में समझना जरूरी है। खाली पूँजी अपने सन्दूक में बंद रखिए, चोरी का, गल जाने का जोखिम वहाँ भी है। घर में रखें या बैंक में, मुद्रास्फीति का भयानक जोखिम तो है ही। हेलमेट बिना दोपहिया और सीट-बेल्ट बिना कार आपने कभी चलाई होगी, तो उस वक्त सबसे बडे जोखिम, अपनी जान के जोखिम के बारे में नहीं सोचा होगा। लेकिन यहां आप पहले एक-एक जोखिम को खोलकर, स्पष्ट समझते हैं, उसका समुचित प्रबंधन करते हैं, तब सही निवेश रणनीति बनाकर लाभ कमाते हैं। अपना कार्यक्षेत्र, तरीका और सोच निर्धारित कर उसे कठोरता से अमल में लाएं तो तमाम जोखिमों से बच जाते हैं। ए तथा बी-1 समूह की उच्च तरलता वाली, बडी और मजबूत, अच्छी चलती कंपनियों में ही निवेश से शुरूआत करें, यहां पंटर कीमतों से ज्यादा छेडछाड नहीं कर पाते। हर भयानक तेजी में एकाएक तमाम ऐसी छुटपुट कंपनियां और उनको बढा़वा देने वाले लोग प्रकट होते हैं जो एक झटके में निवेशकों को मालामाल करने लगते हैं। बाजार का बुखार उतरने पर निवेशक पाता है कि कंपनी डिलिस्टेड हो गई है, कंपनी मुख्यालय खोजा नहीं जा पा रहा, तरलता शून्य है और उसके पास बचे शेयरों का कोई कौडी के भाव भी लिवाल नहीं है। यही जुआ है, अप्रत्याशित लाभ की आशा में अतार्किक फैसले करना, और बाद में अपने अलावा सबको कोसते हुए पछताना। जुआ क्या है? एक ऐसी संभावना, जिसका तर्क नहीं होता। केवल संयोग। कोई भी ताश किसी के पास जा सकता है। कोई पासा किसी भी करवट गिर सकता है। आजाद घूमती चरखी, किसी भी नम्बर पर रूक सकती है। वहाँ घाटे-मुनाफे का कोई आधार नहीं। जीतने वाला हमेशा अपनी किस्मत पर इठलायेगा और हारने पर अपनी बदनसीबी को कोसेगा। निवेश क्या है? लाभ की ऐसी संभावना, जिसके मजबूत आधार होते हैं। आपने ठोंक-बजाकर, अच्छी चलती कंपनी पकडी, उसके मंदी के दौर में, तो आगे सम्भावित अच्छा समय आने पर उसका कारोबार भी बढेगा और आपका शेयर भी। कंपनी की प्रगति इंसानी दिमागी क्षमता, कठोर परिश्रम, लगन और धैर्य की देन होती है, संयोग की नहीं। इस कठोर परिश्रम और सब्र के अच्छे नतीजे देर-सवेर आते ही आते हैं। यह किस्मत का नहीं, समझ, तर्क और सम्भावनाओं को पहचान कर व्यवहार करने का खेल है, जो आपका वफादार कमाऊ साथी बनकर आपकी आर्थिक जिम्मेदारियों के बोझ को बांट लेता है। आपको चिंतामुक्त और प्रसन्न करता है। अगले पीरियड में हम विचार करेंगे कि बाजार में सीधे निवेश या म्युचुअल फंड के जरिए निवेश में कौन सा तरीका नए निवेशक के लिए बेहतर है। तब तक के लिए नमस्कार।
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| आखरी बार संपादन किया गया ( गुरुवार , 02 अक्टूबर 2008 ) | |