शेयर बाजार में रिटर्न 18-20 फीसदी : रामदेव अग्रवाल
  
मुलाकात |  द्वारा/by : मनोज |  शुक्रवार , 18 अप्रेल 2008

raamdeo.jpg मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के निदेशक रामदेव अग्रवाल का मानना है कि विदेशी संस्‍थागत निवेशक अब भारतीय शेयर बाजार में खरीददार बन गए हैं। साथ ही मध्‍य पूर्व देशों ने क्रूड में जो भरपूर कमाई की है उसका एक बड़ा हिस्‍सा भारत के रियलटी और शेयर बाजार में निवेश हो रहा है। वजह साफ है कि भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा हालात में भी रिटर्न 18-20 फीसदी है, जिसे बेहतर कहा जाएगा। रामदेव अग्रवाल से बात की मनोज ने। पेश है बातचीत के मुख्‍य अंश :


शेयर बाजार के लिए पिछले वर्ष यह भविष्‍यवाणी की जा रही थी वर्ष 2008 में यह नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा, लेकिन आज हालात विपरीत है। क्‍या कहना है आपका ?

बाजार की स्थिति में हमेशा समय और कारकों की वजह से बदलाव आता रहता है। अमरीका में हुए सबप्राइम के नतीजों का असर ग्‍लोबलाइजेशन के दौर में पड़ना ही था। मेरा मानना है कि चालू कैलेंडर वर्ष में बीएसई सेंसेक्‍स 15 से 20 हजार के बीच रहेगा। आईटी, मेटल और बैंकिंग स्‍टॉक्‍स में निवेश फायदेमंद है। आपको बताऊं विदेशी संस्‍थागत निवेश इस साल मध्‍य पूर्व देशों से बढ़ने की उम्‍मीद है क्‍योंकि इन देशों ने क्रूड तेल के दाम ऊंचे होने से भारी कमाई की है और अब ये देश यह कमाई भारत में रियल इस्‍टेट और शेयर बाजार में लगाना चाहते हैं। इन देशों को पता है कि भारत में उन्‍हें बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

अर्थव्‍यवस्‍था के बदले हालात में सबसे बड़ी चुनौती क्‍या है ?

हमारे देश में महंगाई को रोकना बड़ी चुनौती है और इसके लिए हमें कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्र में पूरी तरह आत्‍मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा। मसलन स्‍टील आयात की निर्भरता समाप्‍त या कम की जानी चाहिए जैसे कि आज हम सीमेंट में पूरी तरह आत्‍मनिर्भर हो गए हैं उसी तरह दूसरे उत्‍पादों में हमें ध्‍यान देना चाहिए। इसके अलावा कृषि उत्‍पादन गेहूं, दलहन, तिलहन, चावल आदि का उत्‍पादन बढ़ाने के जोरदार प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए अपने किसानों को प्रशिक्षित करना होगा। फार्मर एज्‍युकेशन पर विशेष बल देना चाहिए। सिंचाई के साधनों को बढ़ाना जरुरी है। जब देश कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में मजबूत बनेगा तो स्‍वाभाविक है अर्थव्‍यवस्‍था बदली हुई नजर आएगी। क्रूड के ऊंचे दाम हमारी अर्थव्‍यवस्‍था पर विपरीत असर डाल रहे हैं। अपने यहां एक्‍सप्‍लोरेशन  गतिविधियां बढ़ाकर कुछ हद तक इससे निपटा जा सकता है।

विदेशी निवेश का रुख अब क्‍या रहेगा ?

देखिए, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में अब बिकवाली नहीं है, बल्कि वे खरीददार बन रहे हैं। हालांकि, यह खरीद बेहतर कंपनियों में हो रही हैं जहां स्‍वाभाविक हैं कि रिटर्न अच्‍छा मिलता है। इससे यह तय है कि आने वाले दिनों में आम निवेशक का भी शेयर बाजार में विश्‍वास लौटेगा। निवेशकों को लंबी अवधि का व्‍यू लेते हुए बेहतर कंपनियों के शेयरों में निवेश शुरु कर देना चाहिए। मेरी राय में शेयर बाजार से कमाई की दर 18 से 20 फीसदी  बनी रहेगी। निवेशक बाजार में विश्‍वास लौटने का इंतजार कर रहे हैं और ऐसा होते ही खरीद बढ़ेगी। बाजार को कुछ सकारात्‍मक संकेतों की प्रतीक्षा है।

 

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आखरी बार संपादन किया गया ( सोमवार , 15 मार्च 2010 )