सत्यम को बेलआउट पैकेज नहीं देगी सरकार
  
बिजनेस |  द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता |  गुरुवार , 15 जनवरी 2009
नई दिल्‍ली। सरकार सत्यम कंप्‍यूटर को बेलआउट पैकेज नहीं देगी। दरअसल पिछले एक दो दिनों से ख़बरों का बाज़ार गर्म था कि सरकार सत्यम को डूबने से बचाने के लिए अमरीकी सरकार की तर्ज पर बेलआउट पैकेज देने जा रही है। अटकलें लगाई जा रही थी कि सरकार कर्मचारियों के वेतन और रोजमर्रा के ख़र्चों के लिए 2000 करोड़ का पैकेज देगी। माना जा रहा था कि सरकार 500-500 करोड़ रुपए की चार किश्तों में ये पैसा देगी।

सरकार की ओर से हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय में चल रही चर्चा के मुताबिक सरकार सत्यम को बेलआउट पैकेज नहीं देगी। कम से कम सीधे आर्थिक मदद देने के विकल्प को त्याग देने का फ़ैसला किया गया है। दरअसल एक दो दिन पहले यूपीए सरकार के दो मंत्रियों, पीसी गुप्ता और कमलनाथ ने ख़ुद सत्यम को आर्थिक मदद की संभावना जता कर बेलआउट पैकेज को हवा दी थी। लेकिन सरकार के अन्य धड़ों में इस बात को लेकर सहमति नहीं बन पाई।

 बेलआउट पैकेज न देने का कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार सत्यम की हिस्सेदारी लेकर ही उसकी सीधी आर्थिक मदद कर सकती है। हिस्सेदारी ख़रीदने की स्थिति में सरकार सत्यम की आंशिक मालिक बन जाएगी। ऐसी हालत में अमरीका और भारत में सत्यम के ख़िलाफ़ जो मुकदमें दायर किए हैं उनमें सरकार को भी फंसना होगा। सरकार इन कानूनी पचड़ों में पड़ने से बचना चाह रही है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार अब सीधे बेलआउट पैकेज के बजाए अप्रत्यक्ष रूप से सत्यम की मदद करने के बारे में सोच रही है। इसके लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। एक विकल्प तो ये है कि सत्यम के ख़र्चों का सही आकलन करने के बाद कुछ सरकारी बैंकों को राज़ी किया जाए कि वे कंपनी को आसान शर्तों पर कर्ज़ दे दें।

सरकार सत्यम के लिए संभावित ख़रीदार की भी तलाश कर रही है। इसमें टेक महिंद्रा, एल एंड टी, अनिल अंबानी के नाम जब तब उछलते भी रहे हैं। हालांकि ये अभी बहुत दूर की कौड़ी लगती है। इसका कारण यह है कि किसी को अभी ये भरोसा नहीं हो रहा है कि सत्यम का वैल्यूशन वाकई कितना होगा।

कोढ़ में खाज़ ये कि आज सत्यम के ऑडिटर पीडब्‍लूसी ने आज नए बोर्ड को चिट्ठी लिख कर कहा कि 2000 से लेकर 2008 तक की उसकी ऑडिट रिपोर्ट पर उसे ख़ुद भरोसा नहीं है क्योंकि अकाउंट ख़ुद मैनेजमेंट तैयार करता था। हालांकि अब केपीएमजी और डेलॉयट को सत्यम के अकांउट को दोबारा ऑडिट करने की ज़िम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अब सत्यम की वित्तीय स्थिति के बारे में स्थिति साफ़ होने की उम्मीद है।

दूसरे विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञ भी बेलआउट पैकेज को सही नहीं मानते। ये एक बेहद ग़लत मिसाल होगी। कल को कोई भी कंपनी घपले करेगी और सरकार से बेलआउट पैकेज मांगने चली आएगी। क्या सरकार हर कंपनी के कर्मचारियों के भविष्य का हवाला देकर उसे बेलआउट पैकेज देती फिरेगी।

विशेषज्ञों ही नहीं आम निवेशकों को भी लगता है कि सत्यम को आर्थिक मदद करना ठीक नहीं है। छूटते ही वे कहते हैं हमारे टैक्स के पैसे को सरकार ऐसे ही किसी को कैसे बांट सकती है। इससे तो घपला करने वालों को और शह मिलेगी कि जी घपले किए जाओ सरकार तो है ही बचाने के लिए। 

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