शेयर बाजार में शार्ट करने से बचें निवेशक : पारस दोषी
  
मुलाकात |  द्वारा/by : मोलतोल संवाददाता |  सोमवार , 06 अप्रेल 2009
paras-dosi.jpgभारतीय शेयर बाजार के निवेशक अभी तक शार्ट करने की अपनी मानसिकता से नहीं निकल पाएं हैं जबकि बाजार का पूरा रुख बदल चुका है। मौजूदा समय में निवेशक पहले शेयर खरीदें और फिर बेचें अन्‍यथा उन्‍हें आने वाले दिनों में भारी नुकसान हो सकता है। निवेशक उन शेयरों से जरुर बाहर निकल जाएं जिनमें चार्म खत्‍म हो चुका है। सरकार चाहे कांग्रेस की बने या भाजपा की, शेयर बाजार पर इसका सकारात्‍मक असर ही होगा क्‍योंकि दोनों दलों की आर्थिक नीतियों में खास अंतर नहीं है। सेंसेक्‍स मौजूदा स्‍तर से 500 अंक और निफ्टी 150 अंक बेहद जल्‍द बढ़ जाएगा। यह कहना है‍ इंडो थाई सिक्‍युरिटीज लि., इंदौर के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पारस दोषी का। पारस दोषी से मोलतोल संवाददाता ने शेयर बाजार की मौजूदा गर्मी पर बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्‍य अंश।

जी-20 देशों की बैठक का शेयर बाजार पर क्‍या असर दिखाई देगा?

जी-20 देशों की बैठक का समूची दुनिया के शेयर बाजारों पर बेहतर असर दिखाई दे रहा है। इस बैठक से शेयर बाजारों में विश्‍वास पैदा होगा। मंदी को दूर करने के लिए जो एक ट्रिलियन डॉलर का महापैकेज घोषित किया गया है वह बाजारों को सकारात्‍मक से स्थिर बनाने में मदद करेगा। इस मंच से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत साबित करने का बेहतर मौका मिला। दुनिया को यह संदेश गया है कि भारत बुरी स्थिति में नहीं है जैसा कि पहले सोचा जाता था। अब हमने अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक के सामने झोली फैलाए खड़े नहीं हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मंच से जो संदेश दिया उसके मुताबिक हम अब कर्ज नहीं लेंगे, बल्कि आईएमएफ जैसी संस्‍थाओं को धन देने की स्थिति में है। हम घबराहट वाली मानसिक स्थिति में नहीं हे और यह बता दिया कि हम मौजूदा माहौल में टिक सकते हैं। जी-20 देशों की इस बैठक के बाद अब हर जगह से बड़ी-छोटी सकारात्‍मक खबरें आती रहेंगी जो अर्थव्‍यवस्‍था को ऊपर उठाने के अलावा शेयर बाजारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। असल में जी-20 देशों की इस बैठक का सबसे अधिक फायदा भारत को हुआ है। भारतीय उद्योगों के प्रति दुनिया में भरोसा बढ़ेगा।

जी-20 देशों की बैठक के बाद कमोडिटीज में अचानक तेजी आई है इसका कमोडिटी शेयरों पर कैसा असर देखने को मिलेगा?


यह सही है कि जी-20 देशों की बैठक के बाद विभिन्‍न कमोडिटी के भाव बढ़े हैं। शेयर बाजार की अगुवाई मेटल शेयरों ने की है और ये सकारात्‍मक रुप से बढ़ रहे हैं। यदि हम मासिक चार्ट देखें तो 24-18 महीनों में इन शेयरों में जहां बिकवाली थी वहां अब खरीद दिख रही है। लांग टर्म व्‍यू बन रहा है। इस समय शेयर बाजार और कमोडिटीज बाजार एक साथ बढ़ रहे हैं जो बेहतर है। जी-20 देशों की बैठक के बाद अब हमें अलग अलग जगहों से अनेक ऐसी घोषणाएं सुनने को मिलेंगी जो शेयर एवं कमोडिटी बाजारों के लिए फायदेमंद होंगी। ऐसी दस बीस घटनाएं हो जाएं तो आप देखेंगे बाजार पूरी तरह पॉजिटिव बन जाएंगे।

कमोडिटी शेयरों पर इसका अच्‍छा असर देखने को मिलेगा लेकिन एग्री कमोडिटी में जल्‍दी खासा करंट देखने को न मिलें क्‍योंकि देश में इस समय आम चुनाव का माहौल है और सरकार नहीं चाहेगी कि एग्री कमोडिटी में तेजी आए। सरकार हर तरह से ऐसे कृत्रिम प्रयास करेगी कि इन कमोडिटी के दाम दबे रहें या बढ ना पाएं। सरकार यही चाहती है कि उद्योग उसे एक दो महीने संभाल लें जब तक चुनाव है, बाकी तो वह उद्योग को साल भर संभाल लेगी। चुनाव के बाद खाद्य तेलों के आयात पर डयूटी लगाने, स्‍टॉक सीमा लगाने जैसे कदमों की समाप्ति आदि आदि दिखाई देंगे तब एग्री कमोडिटी शेयरों में करंट दिखाई देगा। जबकि मेटल ऐसा क्षेत्र हैं जहां इस समय सरकार कुछ खास नहीं कर सकती, अत: ऐसे स्‍टॉक में रैली बनी रहेगी।

हमारी सरकार भी नहीं चाहेगी कि महंगाई दर नकारात्‍मक हो जाए। विकासशील देशों के लिए महंगाई दर का आदर्श आंकडा 4 से 6 फीसदी होता है और आप देखिएगा चुनाव के बाद हम इस दर पर पहुंचते हुए दिखेंगे। महंगाई दर शून्‍य या बेहद नीचे होने पर औद्योगिक विकास का पहिया रुक जाता है। इस मुद्रास्‍फीति पर तीन से चार फीसदी का ब्‍याज जोड़ लें तो ब्‍याज दरें 8-8.5 फीसदी उचित रहती हैं। सरकार और उद्योग भी यही चाहते हैं कि उनके विकास के लिए ब्‍याज दरें इसी रेंज में रहें। सरकार का प्रयास भी यही होगा कि ब्‍याज दर को इससे ज्‍यादा न बढ़ने दिया जाए।

शेयर बाजार की मौजूदा तेजी कहीं चुनाव तक तो नहीं। साथ ही मौजूदा माहौल में निवेशक को किस तरह ट्रेड करना चाहिए?

शेयर बाजार में आई मौजूदा तेजी 200 दिन के स्‍तर को छूने की ओर बढ़ रहा है। अगले 10-15 दिन तक शेयर बाजार बढ़ेगा और मौजूदा स्‍तर से सेंसेक्‍स में 500 अंक एवं निफ्टी में 150 अंक की बढ़ोतरी दिखती है। इसके बाद बाजार नीचे आएगा लेकिन बुरे हाल की स्थिति नहीं होगी क्‍योंकि देश में अगली सरकार को लेकर भ्रम नहीं है। सभी को पता है कि अगली सरकार भी मिली जुली सरकार होगी। कांग्रेस हो या भाजपा वे भी जानते हैं कि किसी को भी साफ बहुमत नहीं मिलेगा और क्षेत्रीय दलों का सहयोग लेना ही होगा। यह सारा घटनाक्रम दस दिन का रहेगा एवं चुनाव नतीजों के साथ शेयर बाजार कई चीजें डिस्‍काउंट कर जाएगा।

सरकार कांग्रेस की बनें या भाजपा की वे सामाजिक और आर्थिक सुधारों से पीछे नहीं हट सकतीं और इन दोनों दलों की नीतियां लगभग एक ही समान है। कार्य करने की शैली भी समान है। अब बीच में सरकार जाने का खतरा भी नहीं है। सभी जानते हैं कि मिली जुली सरकार पांच साल तक चल जाती है। खुद कोई भी दल नहीं चाहता कि मध्‍यावधि चुनाव हो, चुनाव लड़ना और जीतना अब आसान नहीं रहा इसलिए अगली सरकार कोई भी आए वह पांच साल तक चलेगी। लेकिन भारतीय मार्क्‍सवादी पार्टी का प्रधानमंत्री आता है या मायावती प्रधानमंत्री बनती हैं तो बाजार में डर फैलेगा और वहां हम खासी गिरावट देख सकते हैं। निवेशकों को मेरी सलाह है कि अब वे पहले शेयर खरीदें और फिर बेचें। लेकिन निवेशक शार्ट सेल की मानसिकता से नहीं निकल पाएं और शार्ट कर नुकसान खा रहे हैं। निवेशकों को अपने विचार बदलने होंगे। अब पहले खरीदों और फिर बेचों, मुनाफा होगा।

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आखरी बार संपादन किया गया ( सोमवार , 15 मार्च 2010 )